पेश हुआ परमाणु जवाबदेही विधेयक

संसद
Image caption मार्च में भी परमाणु जवाबदेही विधेयक पेश करने की कोशिश की गई थी

विवादित परमाणु जवाबदेही विधेयक विपक्ष के शोर-शराबे और वॉकआउट के बीच शुक्रवार को लोकसभा में पेश कर दिया गया. प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री पृथ्वीराज चौहान ने इसे पेश किया.

विपक्षी ग ठबंधन एनडीए और वामदलों ने इसे ग़ैरक़ानूनी और असंवैधानिक कहा है.

भारत और अमरीका के बीच हुए असैन्य परमाणु समझौते को लागू करने के लिए इस विधेयक का पारित होना ज़रूरी है.

इस विधेयक में किसी परमाणु दुर्घटना की स्थति में मुआवज़ा देने का प्रावधान है.

विधेयक में कहा गया है कि यदि कोई परमाणु दुर्घटना घटती है तो संयंत्र चलाने वाले को मुआवज़े के रुप में अधिकतम 500 करोड़ रूपए अदा करने पड़ेंगे.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार इस प्रावधान का विपक्षी पार्टी और वामदल विरोध कर रहे हैं.

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेता वासुदेव आचार्या और रामचंद्र डोम, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के गुरुदास दासगुप्ता और भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी और यशवंत सिन्हा ने इस विधेयक का विरोध किया.

उनका कहना था कि ये विधेयक से संविधान के अनुच्छेद 21 का उलंघन होगा, जिसके तहत जीने के अधिकार जैसे मौलिक अधिकार आते हैं.

उनका कहना था कि इस विधेयक से पीड़ितों को मुआवज़े की राशि बढ़ाने के लिए अदालत जाने के अधिकार से भी वंचित होना पड़ेगा.

भाजपा के वरिष्ठ सांसद यशवंत सिंहा ने आरोप लगाया कि सरकार ये विधेयक अमरीका के दवाब में पास कर रही है.

विपक्षी की नेता सुषमा स्वराज ने कहा कि उनकी पार्टी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से कहा है कि इस विधेयक में संशोधन होना चाहिए लेकिन सरकार इसे यथावत ही पारित करवाना चाहती है.

वित्तमंत्री और लोकसभा में सदन के नेता प्रणब मुखर्जी और संसदीय कार्य मंत्री पवन कुमार बंसल ने कहा कि बिल के पेश होते समय विधेयक की विषय सामग्री पर टिप्पणी नहीं की जा सकती.

इसके बाद भाजपा ने इस विधेयक के विरोध में लोकसभा से वॉकआउट किया.

इसी वर्ष के मार्च महीने में जब इस विधेयक को पेश करने की कोशिश की गई थी तब समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव और राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने इसका विरोध किया था, लेकिन इस बार ये दोनों सरकार के साथ दिखाई दे रहे हैं.

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