झारखंड में असमंसज बरक़रार

रघुवर दास और अर्जुन मुंडा
Image caption रघुवर दास और अर्जुन मुंडा मुख्यमंत्री पद के दो दावेदार हैं

भारतीय जनता पार्टी झारखंड में नए मुख्यमंत्री के नाम पर मंगलवार को भी कोई फ़ैसला नहीं कर सकी.

रांची पहुँचने के बाद भाजपा के तीन वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी के विधायकों और सांसदों के साथ बैठकें कीं, लेकिन मुख्यमंत्री के नाम पर कोई सहमति नहीं बन सकी.

भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और राज्य की प्रभारी करुणा शुक्ला ने जानकारी दी कि मुख्यमंत्री के नाम पर अब तक कोई फ़ैसला नहीं हो सका है.

उधर झारखंड मु्क्ति मोर्चा के नेताओं की एक बैठक मंगलवार देर शाम शुरु खत्म हई, लेकिन इसका कोई नतीजा नहीं निकल सका.

दरअसल भारतीय जनता पार्टी चाहती है कि सरकार के शेष कार्यकाल तक पार्टी का ही मुख्यमंत्री रहे, जबकि झारखंड मुक्ति मोर्चा का कहना है कि बचे हुए कार्यकाल को दोनो दलों के बीच बाँट दिया जाए.

सूत्रों का कहना है कि दोनो दलों के बीच बातचीत का सिलसिला जारी रहेगा.

ग़ौरतलब है कि भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी ने मुख्यमंत्री के नाम तय करने के लिए राजनाथ सिंह, अनंत कुमार और करुणा शुक्ला को रांची भेजा था.

चर्चा

मुख्यमंत्री पद के दावेदारों के रुप में अर्जुन मुंडा और रघुवर दास का नाम सामने आया है. अर्जुन मुंडा पहले प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और रघुवर दास इस समय राज्य के उप-मुख्यमंत्री हैं.

वैसे तो पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा का नाम भी दावेदारों में है लेकिन राज्य की राजनीतिक परिस्थितियाँ उनके पक्ष में नहीं दिख रही हैं.

Image caption शिबू सोरेन को एक बार फिर अपना कार्यकाल अधूरा छोड़ना पड़ा है

उल्लेखनीय है कि गत शनिवार को झारखंड मुक्ति मोर्चा और भाजपा के बीच एक राजनीतिक समझौता हो गया था जिसके बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा ने यह मान लिया था कि वह भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार का समर्थन करेगी.

माना जा रहा है कि इसके बदले में वर्तमान मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के बेटे हेमंत सोरेन को उप-मुख्यमंत्री बनाया जाएगा.

रघुवर दास इस समय उप-मुख्यमंत्री हैं और ज़ाहिर तौर पर विधानसभा के सदस्य हैं. अर्जुन मुंडा इस समय लोकसभा के सदस्य हैं और यदि वे मुख्यमंत्री बनाए जाते हैं तो लोकसभा की यह सीट खाली हो जाएगी.

भाजपा के भीतर इस बात को लेकर अभी भी एकमत नहीं है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा नेता शिबू सोरेन पर भरोसा किया जाए या नहीं, लेकिन पार्टी राज्य में सरकार के गठन का मौक़ा भी नहीं गँवाना चाहती.

82 सदस्यों वाली विधानसभा में भाजपा और झारखंड मुक्ति मोर्चा के 18-18 सदस्य हैं. इसके अलावा इस गठबंधन को ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (आजसू) के पाँच सदस्यों और जनता दल (यूनाइटेड) के दो सदस्यों का समर्थन भी हासिल है. दो निर्दलीय भी इस गठबंधन के साथ हैं.

राज्य में इस राजनीतिक संकट के बाद से कांग्रेस के नेता लगातार मांग कर रहे हैं कि वहाँ राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया जाए.

यह राजनीतिक संकट 28 अप्रैल को शुरु हुआ था जब यूपीए सरकार के बजट पर एनडीए और अन्य विपक्षी दलों के कटौती प्रस्ताव पर शिबू सोरेने ने यूपीए के पक्ष में वोट दे दिया था.

इसके बाद भाजपा ने सरकार से समर्थन वापसी की घोषणा कर दी थी. लेकिन बाद में भाजपा के साथ झारखंड मुक्ति मोर्चा का नया राजनीतिक समझौता हुआ.

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