उड़ीसा में पोस्को का विरोध,20 घायल

स्टील प्लांट
Image caption पोस्को ने वर्ष 2005 में उड़ीसा सरकार से इस्पात इकाई बनाने का समझौता किया था.

उड़ीसा के जगतसिंहपुर ज़िले में दक्षिण कोरियाई स्टील कंपनी पोस्को की प्रस्तावित स्टील फ़ैक्ट्री का विरोध कर रहे ग्रामीणों और पुलिस के बीच झड़पें हुई हैं, जिसमें 15 आंदोलनकारी और पांच पुलिस वाले घायल हुए हैं.

हालांकि पुलिस के अनुसार तीन ही प्रदर्शनकारी घायल हुए हैं. ये लोग पिछले तीन महीने से विरोध कर रहे हैं.

पुलिस का कहना है कि इलाक़े को प्रदर्शनकारियों से ख़ाली करा लिया गया है. ये प्रदर्शनकारी बालीटुथा गांव में पोस्को के संयत्र की ओर जाने वाले अहम मार्ग पर पड़ाव डाले हुए थे और इनकी संख्या एक हज़ार तक बताई जाती है.

पुलिस अधीक्षक देवदत्त सिंह ने बीबीसी को बताया कि जब ग्रामीणों को मार्ग से बाधा हटाने और इलाक़े को ख़ाली करने के आदेश दिए गए तो उन्होंने ऐसा करने से इनकार किया, तब जा कर पुलिस ने 'ज़रूरी कार्रवाई' की.

उन्होंने बताया कि इलाक़े को ख़ाली करने के लिए पुलिस ने आंसूगैस और रबर की गोलियां दागीं, जबकि प्रदर्शनकारियों ने भी लगभग सौ देशी बम फेंके, जिससे पांच पुलिसकर्मी ज़ख़्मी हो गए.

जगतसिंहपुर ज़िले के पुलिस अधीक्षक का कहना था कि ग्रामीणों ने लगभग चार सौ देशी बम इकट्ठा किए थे जिनमें तीन सौ बमों को पुलिस ने अपने क़ब्ज़े में ले लिया है.उनका कहना है कि फ़िलहाल स्थिति नियंत्रण में हैं.

उधर पोस्को प्रतिरोध संग्राम समिति के अध्यक्ष अभय साहू ने पुलिस कार्रवाई की निंदा की और बीबीसी को बताया कि एक सौ प्रदर्शनकारी घायल हुए हैं.

उनका कहना था कि लोग आख़िरी दम तक पोस्को का विरोध जारी रखेंगे.

इससे पहले प्रशासन ने एहतियात के तौर पर जगतसिंहपुर के सीपीआई सांसद बीभू प्रसाद तराई, कांग्रेस नेता उमेश स्वाइन और जयंत विस्वाल को हिरासत में ले लिया था.

मामला

पुलिस अधीक्षक ने बीबीसी को बताया कि बालीटुथा गांव में धरने पर बैठे ग्रामीण किसी किसी भी सरकारी अधिकारी और पुलिस को इलाक़े के अंदर नहीं जाने दे रहे थे और प्रशासन पिछले तीन महीने से प्रयास कर रहा था कि धरने पर बैठे लोग शांतिपूर्वक अपना प्रदर्शन वापस ले लें, लेकिन जब इन लोगों ने नहीं माना तो पुलिस ने कार्रवाई की.

पुलिस के अनुसार धरने पर बैठे लोगों ने फ़ैक्ट्री के समर्थक गांव वालों को भी उनके गांव से बाहर निकाल रखा था और उन्हें कैंप में रहने को मजबूर कर रखा था.

पोस्को ने जून 2005 में उड़ीसा सरकार के साथ 30 लाख टन क्षमता वाली इस्पात इकाई बनाने के लिए समझौता किया था.

यह संयंत्र वर्ष 2010 तक तैयार होना है और इस पर 12 अरब डॉलर का निवेश होगा.पोस्को पारादीप में ही फैक्ट्री के लिए अलग से एक बंदरगाह बनाने की योजना बना रही है.

हालाँकि समझौता होने के बाद से ही स्थानीय आदिवासी समुदाय इसका विरोध कर रहा है.

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