मक्का मस्जिद विस्फोट की तीसरी बरसी

मक्का मस्जिद

एक ऐसे दिन जबकि हैदराबाद ने तनाव और भय के माहौल में मक्का मस्जिद विस्फोट की तीसरी बरसी मनाई, केंद्र गृह मंत्री पी चिदंबरम ने पहली बार इस बात की पुष्टि की है कि अजमेर की दरगाह और मक्का मस्जिद के धमाकों में हिंदू चरमपंथियों का हाथ था.

हालाँकि जब इस महीने के प्रारंभ में राजस्थान पुलिस ने अजमेर की घटना के संबंध में आरएसएस के कार्यकर्ता देवेंद्र गुप्ता और चंद्रशेखर पाटीदार को गिरफ़्तार किया था तब ही से यह ख़बर गर्म थी कि इसी टोली का संबंध मक्का मस्जिद विस्फोट से भी है.

लेकिन यह पहली बार है कि स्वंय गृह मंत्री ने सार्वजनिक रूप से इसकी पुष्टि की है.

मंगलवार को एक निजी टीवी चैनल को दिए गए इंटरव्यू में चिदंबरम ने कहा कि जांच करने वाली एजेंसी को ऐसे प्रमाण मिले हैं कि इसमें ऐसे ग्रुप का हाथ है जिसे एक चरमपंथी हिंदू संगठन का समर्थन प्राप्त है.

उन्होंने कहा ,"हम इसे हिंदू आतंकवाद नहीं कहते. आतंक, आतंक है, इसमें सिर्फ़ इतना अंतर है कि यह ग्रुप कट्टरपंथी चरमपंथी हिंदू विचारधारा पर विश्वास रखता है".

उन्होंने कहा कि छानबीन करने वालों को जो सुराग मिले हैं, उन पर जांच चल रही है.

उन्होंने कहा कि अभी यह मालूम करना बाकी है कि इस में एक संगठन का हाथ है या कई संगठनों ने मिलकर काम किया है.

उन्होंने कहा की अजमेर और हैदराबाद के संबंध में तो सबूत मिला है लेकिन क्या ये लोग समझौता एक्सप्रेस में विस्फोट में भी लिप्त थे, इसका कोई सबूत अभी नहीं मिला है.

तीसरी बरसी

इधर मंगलवार को हैदराबाद में तीसरी बरसी के अवसर पर कड़े सुरक्षा प्रबंध किए गए थे.

Image caption मक्का मस्जिद धमाके में मारे गए नईम की माँ साबिर बेगम उन्हें याद कर रो दीं

इंटेलीजेंस ब्यूरो ने चेतावनी दी थी कि तीन वर्ष पहली की घटनाओं का बदला लेने के लिए चरमपंथी हमला कर सकते है और दूसरी और गत शुक्रवार को तीन अज्ञात बंदूकधारियों ने एक पुलिसकर्मी की हत्या कर दी थी.

पूरे शहर में और विशेष कर मक्का मस्जिद के आसपास बड़े पैमाने पर सशस्त्र पुलिस बल को तैनात किया था और पुलिस गाड़ियों की तलाशी ले रही थी.

दूसरी और पुराने हैदराबाद में मुसलमानों ने दूकानें और कारोबार बंद रखकर अपना विरोध प्रकट किया.

बम विस्फोट और उसके बाद की पुलिस फायरिंग में जिन 15 लोगों की जान गई थी उनके परिवार के सदस्य मंगलवार को मक्का मस्जिद में इकठ्ठा हुए और उन्होंने विशेष प्रार्थना कीं.

इनमें से एक साबिर बेगम, अपने बेटे नईम को याद कर रो दीं.

उन्होंने कहा कि उनके मरे हुए बेटे का चित्र अब भी उन की आँखों में घूमता है और उनका बेटा उन्हें बहुत याद आत है.

उन्होंने इस बात पर भी दुख व्याप्त किया कि इतने घरों को उजाड़ने वाले चरमपंथी अब तक गिरफ्तार नहीं किए गए. उन्होंने कहा कि उन्हें सरकारी नौकरी और घर के लिए जगह देने का वादा भी सरकार ने पूरा नहीं किया है.

हैदराबाद के लोक सभा सदस्य असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि वो इस बात पर उस समय तक विश्वास नहीं करेंगे जब तक की सीबीआई मक्का मस्जिद केस में देवेंद्र गुप्ता और उनके साथियों को गिरफ्तार कर के हैदराबाद नहीं लाती.

इधर हैदराबाद की पुलिस को भी दो बड़े गंभीर आरोपों का सामना है.

आम मुसलमान का आरोप है कि इस केस में पुलिस ने हमेशा ही उनके साथ पक्षपात का प्रदर्शन किया और बम विस्फोट के लिए उनको ही जिम्मेवार ठहराने के साथ उसने उनपर ही गोली चलाई और नौ लोगों को मार दिया.

नागरिक अधिकार निगरानी समिति के सचिव लतीफ़ मोहम्मद ख़ान ने उस रोज़ की घटनाओं की याद ताज़ा करते हुए कहा कि जब विस्फोट की ख़बर सुनने के बाद मुसलमान मस्जिद की तरफ दौड़े और कुछ लोगों ने इसके ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया तो पुलिस ने उन पर अंधाधुंध गोली चला दी.

दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि उसने आत्मरक्षा में गोली चलाई थी.

सरकार ने इस मामले की जाँच के लिए जस्टिस भास्कर राव के नेतृत्व में एक आयोग गठित किया था लेकिन उसने भी अपनी रिपोर्ट अब तक नहीं दी है.

मुस्लिम समुदाय को पुलिस पर दूसरा गुस्सा इस बात का है कि बम विस्फोट की छानबीन के दौरान उसने हैदराबाद के सौ से ज्यादा मुस्लिम युवाओं को पकड़ा था और उन पर चरमपंथी होने के गंभीर आरोप लगाए थे और उनसे अपराध स्वीकार करवाने के लिए उन्हें यातनाएं दी थीं.

उनमें से 26 युवाओं पर षडयंत्र के आरोप लगाए गए और बाकी को छोड़ दिया गया. इन 26 को भी बाद में अदालत ने बरी कर दिया था.

हैदराबाद के मौजूदा पुलिस आयुक्त एके ख़ान कहते हैं कि वो तीन वर्ष पहले की घटनाओं के बारे में कुछ नहीं कह सकते लेकिन अब उन्हें ऐसे शिकायतें मिल रहीं हैं कि इन युवाओं के साथ नाइंसाफ़ी हुई है और उनके पुनर्वास की ज़रुरत है.

ख़ान ने कहा कि यह मामला सरकार के विचाराधीन है और वही इस पर फ़ैसला करेगी.

इधर जिन युवाओं ग़लत आरोप लगाए गए उन्होंने अदालत में एक याचिका दायर करके मांग की है कि उन्हें प्रति व्यक्ति 20 लाख रुपए का मुआवाज़ा दिया जाए और ये पैसा दोषी पुलिस अधिकारियों की निजी संपत्ति से हासिल किया जाए न कि सरकारी खजाने से.

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