बीबीसी इंडिया बोल

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2029 IST इसी एक साथ कार्यक्रम का समय समाप्त हो चला है और रूपा ने भाग लेने वालों का बहुत धन्यवाद दिया.

2029 IST बारमेर से हीरानंद का मत है कि सरकार कि प्राथमिकता गरीबी हटाना ही होना चाहिए

2028 IST कार्यक्रम का वक़्त ख़त्म होने को है और अभी भी कई श्रोता इसमें शामिल हैं.

2027 IST कार्यक्रम में शामिल हो चुके हैं कादिर साहब और कह रहे हैं कि गरीब के मुकाबले खेलों को प्राथमिकता नहीं मिलनी चाहिए

2025 IST राजस्थान से एक बीबीसी श्रोता का कहना है की सरकार की नीति में खोट है, इनको पैसा बचाने चाहिए. गरीबों को उत्थान के लिए पैसे बढ़ने चाहिए

2024 IST बिहार से मुकुंद का कहना है की पैसा गरीब तक पहुँच ही नहीं पा रहा.

2023 IST रूपा झा ने अब गंगाधर से सवाल पूछा है की क्या इतना पैसा खेलों पर खर्च करना ठीक है?

2022 IST भोपाल से फिरोज ने रूपा से कहा है की भरष्टाचार की ही वजह से पैसा गरीबों तक नहीं पहुँच रहा. खेल ज़रूरी है.

2020 IST विवेक के अनुसार गरीबों का विकास तो हो ही रहा है.

2019 IST जबलपुर से विवेक रूपा से कह रहे हैं की बहस का मुद्दा बेहद पसंद आया.

2017 IST रूपा में अब ऐश्वर्या कपूर से कहा है की वे इस कार्यक्रम के लिए भेजी गयी श्रोताओं की टिप्पणियों को पढ़ कर सुनाये.

2015 IST इलाहबाद से बीबीसी श्रोता द्विवेदी का कहना है की इन खेलों का आयोजन देश के लिए वाकई में गर्व की बात है. सरकार जैसे नरेगा वगैरह के लिए खर्च कर रही है इन तमाम योजनाओं के अलावा सरकार और क्या क्या करेगी.

2012 IST उत्तर प्रदेश से भीषम पाल का कहना है की जैसे रोटी कपडा मकान आदमी के लिए अनिवार्य है वैसे ही राष्ट्रमंडल खेल सिर्फ एक दिखावा ही है. गरीबी के इस दौर में राष्ट्रमंडल खेलों पर पैसा खर्च करना कितना अनिवार्य था?

2012 IST बिहार से ताजुद्दीन साहब का कहना है की युवा वर्ग कम काम में ज्यादा पैसा कमाना चाहता है. खेल के आयोजन से भी लाखों लोगों को नौकरी मिली है. क्या गारंटी है की सरकार इतने लोगों को नौकरी देती ?

2009 IST रूपा ने राजस्थान के सकाराम जाखड से सवाल किया है की गरीबी उन्मूलन के कार्यक्रम में कितनी सफलता उनके यहाँ दिख रही है?

2006 IST मधुबनी से नीता कुमारी कह रहीं है की उन्हें गर्व है भारत में राष्ट्रमंडलखेलों का आयोजन हो रहा है लेकिन गरीबों के लिए पैसा का खर्च भी अत्यंत ज़रूरी है.

2006 IST साउदी अरब से बीबीसी श्रोता फ़ोन पर कह रहे हैं की राष्ट्रमंडल खेल से लाखों लोगों को रोज़गार भी मिला है.

2003 IST बीबीसी इंडिया बोल में ताज़ा बहस सरकार के गरीबी उन्मूलन कार्यक्रंम पर चल रही है.

1927 IST - बहस- कॉमनवेल्थ खेलों के कारण ग़रीबों की उपेक्षा कितनी जायज़

1917 IST - या एसएमस करें - 9999-6888-58 पर

1916 IST- नंबर हैं 1800-102-7001 और 1800-11-7000

1916 IST - कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कॉल करें

1915 IST- कॉमनवेल्थ खेल ज़रुरी या ग़रीबों का उत्थान

1914 IST - बहस- कॉमनवेल्थ खेलों के कारण ग़रीबों की उपेक्षा कितनी जायज़

1913 IST- बीबीसी इंडिया बोल में आपका स्वागत है

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