वायुसेना पहुंची मणिपुर की मदद के लिए

Image caption मणिपुर जानेवाले दो राजमार्गों को नगा गुटों ने बंद कर दिया है.

तीन हफ़्तों से आर्थिक नाकेबंदी का सामना कर रहे मणिपुर के लिए केंद्र सरकार ने विमानों के ज़रिए आम ज़रूरत की चीज़ें पहुंचानी शुरू कर दी है.

मणिपुर जानेवाले दो अहम राजमार्गों को नगा अलगाववादी नेता टी मुइवा के समर्थकों ने बंद कर रखा है क्योंकि राज्य सरकार ने मुइवा को मणिपुर की सीमा में स्थित उनके गांव जाने की इजाज़त नहीं दी.

ये दोनों राजमार्ग मणिपुर के लिए जीवनरेखा की तरह हैं और इसपर लगी रोक से वहां खानेपीने की चीज़ो से लेकर दवाओं तक की भारी कमी हो गई है.

पेट्रोल पंप बंद हो गए हैं, क्योंकि आपूर्ति नहीं है. अस्पतालों में दवाओं और ऑक्सीजन की कमी है, अहम ज़रूरत की चीज़ों की काला बाज़ारी हो रही है.

सोमवार से भारतीय वायु सेना के विमानों ने चावल और दवाओं की खेप पहुंचानी शुरू कर दी है.

मणिपुर खाद्य और जन वितरण विभाग के प्रवक्ता ने कहा है कि सोमवार शाम 3.5 मेट्रिक टन चावल राजधानी इंफाल में पहुंच गया है.

Image caption नगा अलगाववादी नेता टी मुइवा

मणिपुर सरकार का कहना है कि उनके पास एक महीने भर का चावल है लेकिन गोदामों में और की ज़रूरत है क्योंकि मानसून आनेवाला है.

जो चावल पहुंचा है उसे खुले बाज़ार में 16 रूपए प्रति किलो की दर से बेचा जाएगा और हर परिवार पांच किलो चावल खरीद सकेगा.

मणिपुर के एक मंत्री एन बीरेन ने बीबीसी को बताया कि नगा आदिवासियों के कई गुटों ने नगालैंड और असम की ओर से मणिपुर आनेवाले दो राजमार्गों को रोक रखा है.

उनका कहना था, “लेकिन हमले मिज़ोरम होकर आनेवाली सड़क जो थोड़ी लंबी है उसका इस्तेमाल शुरू कर दिया है और कुछ चीज़ें आने लगी हैं.”

उन्होंने कहा कि नगा गुटों से बातचीत की भी कोशिश हो रही है लेकिन उनका जवाब नहीं आया है.

ग्रेटर नगालैंड

मणिपुर सरकार का कहना है कि उन्होंने मुइवा को इसलिए उनके गांव जाने से रोका क्योंकि वो वहां एक रैली करनेवाले थे और इससे जनजीवन अशांत हो सकता था.

मणिपुर के गुटों का मानना है कि नगा नेता मणिपुर, असम और अरूणाचल के नगा बहुल क्षेत्रों को मिलाकर एक नगालिम या ग्रेटर नगालैंड बनाने की कोशिश कर रहे हैं.

नगा अलगाववादी गुट एनएससीएन ने कहा है कि वो स्वतंत्र नगालैंड की मांग छोड़ देंगे अगर भारत नगालिम के लिए तैयार हो जाए.

एनएससीएन और भारत सरकार के बीच पिछले तेरह सालों से बातचीत चल रही है.

भारत सरकार ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया है क्योंकि मणिपुर, असम और अरूणाचल प्रदेश में इसे लेकर ख़ासा विरोध है.

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