'अंबेडकर टुडे' मामले की सीआईडी जाँच

‘अंबेडकर टुडे’ पत्रिका में कथित तौर पर वैदिक हिंदू धर्म और देवी देवताओं के बारे में गाली गलौज और आपत्तिजनक लेख छापे जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है.

मायावती सरकार ने पत्रिका की प्रतियाँ ज़ब्त करके सीआईडी जांच बिठा दी है. लेकिन लोग इससे संतुष्ट नहीं हैं. लोगों को लगता है कि यह मामले को दबाने का प्रयास है.

अब एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर माँग कि है कि इस तरह के लेख के प्रकाशन को आपराधिक गतिविधि मानते हुए दोषियों के खिलाफ़ कड़े क़ानूनी कदम उठाए जाएँ.

उन्होंने लिखा है, “अंबेडकर टुडे पत्रिका में जिस प्रकार की अशोभनीय और गंदी भाषा का प्रयोग किया गया है वह गलत है और एक प्रकार से आपराधिक कृत्य है. मैंने यह कहा है कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी वेदना और विचार व्यक्त करने का अधिकार है लेकिन इस प्रकार से किसी धर्म , किसी समाज और संप्रदाय के लिए गालीयुक्त भाषा का प्रयोग करना स्वीकार्य नहीं है.”

हिंदू धर्म पर टिप्पणी

अंबेडकर टुडे पत्रिका सत्तारूढ़ बहुजन समाज पार्टी की नीतियों और विचारधारा की पोषक मानी जाती है और उसे सरकार का संरक्षण प्राप्त है.

इस पत्रिका के संपादक डॉक्टर राजीव रत्न सत्तारूढ़ बहुजन समाज पार्टी के एक वरिष्ठ नेता पारस नाथ मौर्य नेता के पुत्र हैं. मौर्य मुख्यमंत्री मायावती के करीबी माने जाते हैं.

उन्हें राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग का अध्यक्ष बनाकर मंत्री का दर्जा दिया गया है.पत्रिका के मई अंक में ‘वैदिक ब्राह्मण और उसका धर्म’ शीर्षक से एक लेख छपा है जिसके लेखक हैं मध्य प्रदेश के मुरैना जनपद अश्विनी कुमार शाक्य.

इस लेख में हिंदू धर्म और देवी देवताओं के बारे में अनेक आपत्तिजनक बातें छपी हैं. उसकी भाषा भी काफ़ी अभद्र और गालीगलौज वाली है.

एक स्थानीय सांध्य दैनिक ने जैसे ही इस लेख के बारे में खबर छापी सरकार एकदम से चौकन्नी हो गई.

सरकार की तरफ़ से एक विज्ञप्ति जारी करके कहा गया है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच सीआईडी को दे दी गई है.

सरकार ने जौनपुर के जिला मजिस्ट्रेट को पत्रिका कि सभी प्रतियाँ जब्त करने और उसका शीर्षक रद्द निरस्त करने के लिए भी निर्देश दिया. सरकार का कहना है कि पत्रिका के संपादक डाक्टर राजीव रत्न ने लिखित सफाई दी है कि बीमार होने के कारण वह इस अंक में छपे सभी लेख नहीं पढ़ पाए थे.

सरकार के मुताबिक पत्रिका के संपादक ने लेख को एक साज़िश करार देते हुए स्वयं ही सीआईडी जांच की मांग की थी.

यह सब कुल मिलाकर यही दर्शाता है कि पत्रिका के संपादक की सरकार पर कितनी पकड़ है.पत्रिका के संपादक और जौनपुर के ज़िला मजिस्ट्रेट से बात करने की कोशिश की गई. मगर दोनों ने फ़ोन नहीं उठाया.

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