'लैला' तट से टकराई, वेग कम हुआ

Image caption तटीय इलाके दिन में भी रात की तरह नज़र आ रहे हैं.

चक्रवाती तूफ़ान ‘लैला’ अब आंध्र प्रदेश के प्रकाशम ज़िले के बापटला गांव में पहुंच गया है. कुछ ही घंटों में तूफ़ान का दूसरा सिरा तटवर्ती इलाकों को पार कर जाएगा.

तूफ़ान के वेग में कुछ कमी आई है क्योंकि पहले अनुमान था कि जब वो तट से टकराएगा तो हवा की रफ़तार 125 किलोमीटर प्रति घंटे हो सकती है.

इस समय हवा 90 किलोमीटर की रफ़्तार पर है.

लेकिन तेज़ हवा और भारी बारिश से जनजीवन अस्तव्यस्त है. 50,000 से ज़्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है.

अरबी भाषा में लैला काली अंधेरी रात को कहते हैं और आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों में बिल्कुल अंधेरा सा छाया हुआ है.

गहरे काले बादलों ने इलाके को इस तरह ढक रखा है कि गाड़ियां दिन में बिना लाइट जलाए चल नहीं सकतीं.

पिछले चौदह सालों का ये सबसे भीषण तूफ़ान है और इसके वेग का दर्जा उच्चतम स्तर का है.

आंध्र प्रदेश के इतिहास में सबसे विनाशकारी तूफ़ान 1977 में कृष्णा ज़िले में आया था जिसमें 10 हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई थी.

सेना के सौ जवान तैनात किए जा चुके हैं और नौसेना को भी एलर्ट पर रखा गया है.

तबाही

भारी बारिश और तूफ़ानी हवाओं के कारण अबतक 15 लोग मारे गए हैं, कई पुरानी इमारतें गिर गई हैं, और पेड़ उखड़ गए हैं.

प्रकाशम ज़िले में एक जगह 32 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की गई है और कहा जा रहा है कि आंध्र प्रदेश में जितनी बारिश साल भर में होती है उसका एक तिहाई इस दौरान बरस चुका है.

तटीय इलाकों के गांवों में बिजली आपूर्ति ठप हो गई है.

जिन पांच ज़िलों पर लैला का प्रकोप होगा वहां लगभग 12 लाख लोग रहते हैं.

Image caption कई इलाकों में पेड़ उखड़ गए हैं, बिजली नहीं है और लोग सुरक्षित स्थानों की ओर भाग रहे हैं.

प्रशासन ने लगभग आठ सौ गांवों की पहचान की है जहां से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है.

ये गांव निचले इलाके हैं और यहां भारी तबाही की आशंका है.

मछलीपटनम शहर के अंदर कई फ़ीट पानी है.

हैदराबाद से विशाखापतनम, विजयवाड़ा और राजामुंदरी जानेवाली ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है.

हज़ारों एकड़ में लगे आम और केले की फसल को भी भारी नुकसान पहुंचा है और पहले से ही आर्थिक तंगी से जूझ रहे आंध्रप्रदेश के लिए तूफ़ान के बाद स्थिति और विकट हो सकती है.

केंद्रीय मदद

मुख्यमंत्री के रोसैया का कहना है कि मछवारों को सावधान कर दिया गया है और उन्हें आदेश है कि नौकाओं को तट पर ही रखें.

उनका कहना था, “हम इस प्राकृतिक विपदा से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं.”

मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से भी बात की है और उन्होंने केंद्र की ओर से हर संभव मदद का आश्वासन दिया है.

Image caption तूफ़ान से बचने के लिए अस्थाई शिविर बनाए गए हैं.

विशाखापत्तनम से नैलौर तक कई जगहों पर मंगलवार की रात से ही बारिश शुरु हो गई है और 65 से 75 किलो प्रति घंटा की रफ़्तार से हवाएँ चल रही हैं.

मंगलवार रात से होने वाली बारिश में आठ लोगों की मौत हो चुकी है और 19 मछुआरे लापता हैं.

मछलीपटनम में प्रशासन ने 120 राहत कैंप खोले हैं और ज़रूरी वस्तुओं का इंतज़ाम किया है.

इस स्थिति को देखते हुए इस तटीय इलाक़े की सभी बंदरगाहों पर ख़तरे का निशान सात पर यानी सबसे तीव्र तूफ़ान का संकेत दे रहा है. सभी समुद्री जहाज़ों से ज़रूरी अहतियाती क़दम उठाने के लिए कहा गया है.

पूर्वी गोदावरी ज़िले में कृष्णा-गोदावरी भूतल में स्थित प्राकृतिक गैस के कुँओं से गैस निकालने का काम रोक दिया गया है.

राज्य के मुख्यमंत्री के रोसैया ने कहा है कि नौ तटीय ज़िलों के अधिकारियों से कहा गया है कि सभी सरकारी अधिकारी प्राकृतिक आपदा से निपटने में जुट जाएँ. इसीलिए छह हेलिकॉप्टरों को भी तैयार रखा गया है.

नेशनल डिसासटर रेस्पॉंस फ़ोर्स की चार कंपनियों को भी तटीय आंध्र प्रदेश के ज़िलों में तैनात किया गया है. उस इलाक़े में 36 विशेषज्ञों का दल भी पहुँच गया है.

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