'ब्लास्फ़ेमी लॉ'पर फिर चर्चा शुरु

Image caption पाकिस्तान में पैग़म्बर मोहम्मद की तौहीन संबंधी क़ानून की चर्चा गर्म है

इस्लाम के पैग़म्बर मोहम्मद की अपमानजनक सामग्री की जब भी बात होती है तो पाकिस्तान के 'ब्लास्फ़ेमी लॉ' या तौहीने रिसालत क़ानून पर चर्चा शुरु हो जाती है.

इस क़ानून का उस समय प्रयोग होता है जब कोई व्यक्ति इस्लाम की धार्मिक पुस्तक क़ुरान या पैग़म्बर मोहम्मद का अपमान करता है.

लेकिन देश में कई ऐसी घटनाएँ हुई हैं जिनमें यह क़ानून अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ हथियार के तौर पर इस्तेमाल हुआ है.

पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग ने कई बार इस क़ानून को ख़त्म करने या इसमें संशोधन करने की मांग की है क्योंकि इसका दुरुपयोग हो रहा है.

क़ानून

पाकिस्तान के संविधान की धारा 295-बी के अनुसार कोई व्यक्ति अगर क़ुरान पाक या पैग़म्बर मोहम्मद के चरित्र या व्यक्तित्व का अपमान करता है तो उसे आजीवन कारावास या फाँसी की सज़ा दी जा सकती है.

पाकिस्तान में ऐसे कई मामले हुए हैं जिनमें अल्पसंख्यकों पर क़ुरान या पैग़म्बर मोहम्मद का अपमान करने का आरोप लगाकर उनकी हत्या कर दी गई है या फिर अदालत ने मौत की सज़ा सुना दी है.

कराची में अगस्त 2008 में एक फै़क्ट्री में काम करने वाले 22 वर्षीय जगदीश पर उनके साथियों ने आरोप लगाया था कि उन्होंने कथित तौर पर पैग़म्बर मोहम्मद का अपमान किया है.

बाद में फै़क्ट्री के मज़दूरों ने उस ग़रीब हिंदू परिवार के सदस्यों को पुलिस के सामने मारा पीटा और बाद में उन्हें जला दिया था. पुलिस ने न किसी के ख़िलाफ मुक़दमा दर्ज किया और न ही किसी को गिरफ्त़ार किया.

पिछले साल पंजाब के शहर गोजरा में एक ईसाई परिवार पर क़ुरान का अपमान करने का आरोप लगा. गाँव वालों ने आक्रोश में आकर इख़लास मसीह के घर को आग लगा दी जिसमें 5 लोग झुलस कर मर गए जिनमें दो बच्चे भी थे.

इस घटना पर भी पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की थी.

प्रतिबंध

गुरुवार की शाम को कुछ लोग कराची प्रेस क्लब पहुँचे और फे़सबुक और यू-ट्यूब पर प्रतिबंध के ख़िलाफ आवाज़ उठाने की कोशिश की. उनका कहना था कि पूरी वेबसाईट पर पांबदी लगाना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बड़ा प्रश्न चिह्न है.

प्रेस के बाहर कुछ लोगों को जब पता चला कि कुछ लोग प्रतिबंध के ख़िलाफ पत्रकार वार्ता कर रहे हैं तो लोगों ने प्रेस क्लब में दाख़िल होने की कोशिश की और उन लोगों को जान से मारने की धमकियाँ दीं.

फेसबुक और यू-ट्यूब पर जैसे ही प्रतिबंध लगा है पाकिस्तान के अल्पसंख्यक समुदाय का डर बढ़ गया है और वह इस बात से चिंतित हैं कि कहीं यह क़ानून उन के ख़िलाफ इस्तेमाल न हो.

क्योंकि अगर उन पर आरोप लगा तो उनको मार दिया जाएगा या फिर अदालती फैसले से फांसी दे दी जाएगी.

संसद में भी पहली बार कड़े शब्दों में इस क़ानून की निंदा की गई है. पाकिस्तान की लोकतांत्रिक सरकार का यह कर्तव्य है कि वह अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस क़दम उठाए और ऐसे क़दम उठाए जिनसे इस क़ानून का दुरुपयोग न हो.

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