'आधे कश्मीरी आज़ादी चाहते हैं'

कश्मीर पर हुए एक सर्वेक्षण से पता चला है कि भारत प्रशासित जम्मू कश्मीर में 43 प्रतिशत लोग आज़ादी के पक्ष में हैं जबकि पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में 44 प्रतिशत लोग आज़ादी चाहते हैं.

कश्मीर घाटी में आज़ादी के लिए समर्थन का स्तर जहाँ 74 से 95 प्रतिशत तक है वहीं जम्मू में सिर्फ़ एक प्रतिशत, लेह में तीस प्रतिशत और करगिल में सिर्फ़ 20 प्रतिशत जवाब देने वालों आज़ादी की हिमायत की.

ऐसा शायद पहली बार हुआ है कि भारत और पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर की आम जनता की राय जानने के लिए कोई सर्वेक्षण कराया गया है, इस सर्वेक्षण में नियंत्रण रेखा के दोनों तरफ़ रहने वाले 3700 लोगों से उनकी राय पूछी गई है.

लीबिया के शासक कर्नल गद्दाफ़ी के बेटे डॉक्टर सैफ़ अल इस्लाम की पहल पर इसका आयोजन ब्रिटेन के जाने-माने प्रोफ़ेसर और कश्मीर मामले के जानकार डॉक्टर रॉबर्ट ब्रेडनॉक ने किया है.

इस सर्वेक्षण के ज़रिए कश्मीर समस्या और उससे जुड़े पहलुओं पर आम जनता की राय की थाह लेने की कोशिश की गई है. इस नमूना सर्वेक्षण में हिस्सा लेने वाले लोगों से दोनों तरफ़ के कश्मीर के अधिकतर ज़िलों में उर्दू, कश्मीरी, हिंदी और डोगरी में सवाल पूछे गए.

यह सर्वेक्षण पिछले वर्ष सितंबर अक्तूबर के महीने में किया गया.

आज़ादी का सवाल

कश्मीर जैसे जटिल विवाद पर कराए गए पहले सर्वेक्षण के परिणाम भी काफ़ी उलझे हुए हैं, इससे लोगों के विचारों की झलक तो मिलती है लेकिन कोई स्पष्ट या चौंकाने वाला निष्कर्ष सामने नहीं आया है.

डॉक्टर ब्रैडनॉक की रिपोर्ट में एक अहम निष्कर्ष ये है कि कश्मीर समस्या का कोई एक सर्वमान्य हल नहीं है जिस पर आम सहमति बन सके या बहुमत राज़ी हो सके.

संयुक्त राष्ट्र के 1948-49 के जिस प्रस्ताव की अक्सर बात की जाती है उसमें कश्मीर में जनमत संग्रह कराने का प्रस्ताव है, रिपोर्ट में कहा गया है कि जनमत संग्रह या पैल्बिसाइट से भी कोई समाधान निकलने की संभावना नहीं है क्योंकि लोगों की राय काफ़ी बँटी हुई है.

मिसाल के तौर पर पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में जिन लोगों से सवाल पूछे गए उनमें से 44 प्रतिशत ने आज़ादी की माँग का समर्थन किया जबकि भारत प्रशासित जम्मू कश्मीर में यह प्रतिशत कुल मिलाकर 43 रहा.

भारत के नियंत्रण वाले ग्यारह और पाकिस्तान के नियंत्रण वाले सात ज़िलों यानी कुल 18 ज़िलों में यह सर्वेक्षण कराया गया था और उनमें से पाँच ज़िलों में ही पूर्ण आज़ादी के लिए बहुमत है.

दरअसल, जम्मू कश्मीर में आज़ादी को लेकर जनमत काफ़ी ध्रुवीकृत है, कश्मीर घाटी में आज़ादी के लिए समर्थन का स्तर जहाँ 74 से 95 प्रतिशत तक है वहीं जम्मू में सिर्फ़ एक प्रतिशत, लेह में तीस प्रतिशत और करगिल में सिर्फ़ 20 प्रतिशत जवाब देने वालों आज़ादी की हिमायत की.

लोगों से यह सवाल भी पूछा गया वे कश्मीर के भारत या पाकिस्तान के विलय के बारे में क्या राय रखते हैं, जवाब देने वाले 21 प्रतिशत लोगों ने कश्मीर के भारत में विलय की बात कही जबकि 15 प्रतिशत लोगों ने कहा कि पूरा कश्मीर पाकिस्तान में चला जाना चाहिए.

इस सर्वेक्षण में कहा गया है कि कश्मीरी जनता आर्थिक समस्याओं और ख़ास तौर पर बेरोज़गारी से काफ़ी परेशान है, नियंत्रण रेखा के दोनों तरफ़ के 81 प्रतिशत लोगों ने कहा कि बेरोज़गारी उनकी सबसे बड़ी समस्या है.

यहाँ यह बता देना ज़रूरी है कि यह जनमत संग्रह नहीं बल्कि सैंपल सर्वे यानी नमूना सर्वेक्षण था जिसके आयोजन में प्रतिष्ठित संस्थाओं मोरी और फैक्ट्स ने अहम भूमिका निभाई है.

संबंधित समाचार