क्या राजनीति से दूर रहें महिलाएँ?

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2029IST: और अब समय हो चुका है कार्यक्रम को समाप्त करने का. इसमें भाग लेने वाले सभी श्रोताओं को धन्यवाद.

2027 IST: पश्चिम बंगाल से एक श्रोता रियाज़ कहते हैं कि आज बहुत सी महिलाएं ऐसी हैं जो विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रही हैं इसलिए उन्हें निस्संदेह राजनीति में आना चाहिए.

2026 IST: अलवर से निमिषा कहती हैं कि महिलाओं को जानबूझकर कम करके आंका जाता है. जबकि वो हर क्षेत्र में दक्ष हो सकती हैं. लेकिन तजुद्दीन अभी भी इसी बात पर अड़े हैं कि महिलाओं को घर के भीतर ही रहना चाहिए. निमिषा और तजुद्दीन के बीच इस बात को लेकर बहस काफी गर्म हो गई है.

2023 IST: हीराराम सोलंकी भी राजनीति में आने को सही मानते हैं और कहते हैं कि उन्हें बाहर आने चाहिए.

2021 IST: राधारमण कहते हैं कि अगर महिला अंतरिक्ष में जाने से लेकर राष्ट्रपति बन सकती है तो वो राजनीति में क्यों न आए. लेकिन तजुद्दीन सवाल करते हैं कि कितने लोग हैं जो कि अपने घर की महिलाओं को राजनीति में जाने की अनुमति देंगे.

2019 IST: लेकिन नीता कुमारी तजुद्दीन की बात का प्रतिरोध करती हैं. उनका कहना है कि किसी एक महिला को उदाहरण बनाकर उसे सभी पर लागू नहीं किया जा सकता.

2018 IST: मो. तजुद्दीन कहते हैं कि घर की सुंदरता महिलाओं से है. राजनीति उनकी उपयुक्त जगह नहीं है.

2016 IST: बीबीसी हिन्दी डॉट कॉम के ज़रिए अमरीका से प्रभुदत्त गांधी कहते हैं कि राजनीति में महिलाओं की भागीदारी से ही लोकतंत्र मज़बूत होगा.

2014 IST: फ़ोनलाइन से एक श्रोता शिवनारायण जुड़े हैं और उनका कहना है कि जिस तरह से पुरुष ने राजनीति को एक पेशा बना रखा है उसी तरह से जो महिलाएं राजनीति में हैं वो भी वही कर रही हैं. कोई फ़र्क नहीं है दोनों में. राजनीति में आने के बाद सब ऐसे ही हो जाते हैं.

2012 IST: मधुबनी बिहार से नीता कुमारी कहती हैं कि जब तक राजनीति में महिलाओं के आने से ही समुचित विकास होगा.

2010 IST: उड़ीसा के एक श्रोता तो यहां तक कहते हैं कि राजनीति में सिर्फ़ महिलाओं को ही आना चाहिए.

2009 IST: उदयपुर से रामगोपाल वर्मा की बहन वार्ड मेंबर हैं और वो राजनीति में महिलाओं के प्रवेश को एक अच्छा संकेत बताते हैं. उनका कहना है कि उनकी बहन इसका जीता जागता उदाहरण हैं.

2008 IST: बिहार से सुरुची कहती हैं कि योग्यता की बात न सिर्फ महिलाओं पर बल्कि पुरुषों पर भी लागू होनी चाहिए.

2006 IST: बीकानेर से एक श्रोता शिवनारायण कहते हैं कि योग्य महिलाओं को राजनीति में आना चाहिए.

2004 IST: लेकिन शब्बीर खन्ना इससे सहमत नहीं हैं. उनका कहना है महिलाओं के लिए राजनीति अच्छी जगह नहीं है.

2002 IST: अंजू कहती हैं कि ये बयान दिगंबर कामत के दिवालिएपन को दर्शाता है.

2001 IST: पंकज कुमार राजनीति में महिलाओं का प्रवेश ठीक नहीं मानते.

2000 IST: कार्यक्रम का संचालन कर रही हैं रूपा झा.

1957 IST: कार्यक्रमको आप ऑनलाइन भी देख सकते हैं.

1951 IST: कार्यक्रम शुरु होगा बस कुछ ही क्षणों में.

1948 IST: अगर आप बीबीसी इंडिया बोल में हिस्सा लेना चाहते हैं तो हमें मुफ़्त फ़ोन कीजिए 1800 11 7000 या 1800 102 7001 पर.

1945 IST: बीबीसी इंडिया बोल में आपका स्वागत है. इस बार का विषय है क्या राजनीति से दूर रहें महिलाएँ?

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