झारखंड में राष्ट्रपति शासन की संभावना

शिबू सोरेन
Image caption शिबू सोरेन गठबंधन को लेकर हमेशा अपना रुख बदलते रहे हैं.

झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता शिबू सोरेन के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़े के बाद अब राज्य में राष्ट्रपति शासन लगने की संभावना बढ़ गई है.

राज्य में किसी भी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं है. खंडित जनादेश के बाद झामुमो के रवैय्ये को देखते हुए बड़े दल उनके साथ गठबंधन करने से कन्नी भी काट रहे हैं.

ऐसे में परिस्थितियां राष्ट्रपति शासन की तरफ ही इशारा कर रही हैं.

राज्य में बीजेपी के पास 18, झामुमो के 18, कांग्रेस की 14, झारखंड विकास मोर्चा की 11, आजसू-5, राजद-5 और अन्य के पास आठ सीटें हैं.

ऐसे में कोई भी सरकार बिना झामुमो के समर्थन के नहीं बन सकती है लेकिन पिछले वर्षों में गठबंधन धर्म के प्रति झामुमो के रवैय्ये से कांग्रेस और बीजेपी काफी परेशान रहे हैं.

उल्लेखनीय है कि पिछले महीने मंहगाई पर कटौती प्रस्ताव के दौरान शिबू सोरेन ने कांग्रेस के पक्ष में वोट डाला था जबकि राज्य में वो बीजेपी के साथ सरकार में हैं.

बीजेपी ने समर्थन वापस लिया जिसके बाद पिछले कई हफ्तों से गठबंधन को बचाने की कोशिशें होती रहीं. हालांकि शिबू सोरेन के बार बार बदलते रुख ने बीजेपी के लिए गठबंधन में बने रहना मुश्किल कर दिया और बीजेपी ने सरकार से हटना ही उचित समझा.

अब शिबू सोरेन के पास न तो कांग्रेस का समर्थन है और न ही बीजेपी का. हालांकि अभी भी राज्य में सरकार बनाने के लिए जोड़तोड़ जारी है और बातचीत चल रही है लेकिन मुश्किल है कि जल्दी कोई सरकार बन सके.

झारखंड में पहले भी राष्ट्रपति शासन लग चुका है और पिछले चुनावों के बाद भी राज्य में जनादेश बंटा हुआ देखा गया था.

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