अक्षरधाम: मौत की सज़ा बरक़रार

अक्षरधाम मंदिर, गुजरात
Image caption अक्षरधाम मंदिर में हथियारबंद चरमपंथियों ने घुसकर गोलीबारी की थी

गुजरात हाईकोर्ट ने गांधीनगर के अक्षरधाम मंदिर पर वर्ष 2002 में हुए चरमपंथी हमलों के तीन दोषी लोगों की अपील ख़ारिज करते हुए मौत की सज़ा को बरकरार रखा है.

विशेष पोटा अदालत ने उन्हें मौत की सज़ा सुनाई थी.

इस हमले में 32 लोगों की मौत हुई थी और कई घायल हुए थे.

इस मामले में दोषी ठहराए गए सभी छह लोगों ने पोटा अदालत के फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील की थी.

नियमानुसार चूंकि विशेष अदालत के फ़ैसले को हाईकोर्ट से अनुमोदित भी करवाना होता है, इसलिए गुजरात अदालत ने भी हाईकोर्ट में अनुमोदन याचिका लगाई थी.

दोनों ही याचिकाओं पर सुनवाई साथ-साथ चली और वर्ष 2008 में सुनवाई पूरी हो गई थी. इसके बाद अदालत ने अपना फ़ैसला सुरक्षित रख लिया था.

आरएम दीक्षित और केएम ठाकर के पीठ ने मंगलवार को फ़ैसला सुनाया.

पोटा की विशेष अदालत ने जुलाई, 2006 में दिए अपने फ़ैसले में अदम अजमेरी, शान मियाँ और मुफ़्ती अब्दुल क़य्यूम को मौत की सज़ा सुनाई थी.

मोहम्मद सलीम शेख़ को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई थी जबकि अब्दुल मियाँ क़ादरी को 10 साल और अल्ताफ़ हुसैन को पाँच साल की सज़ा सुनाई गई गई थी.

नियमानुसार दोषी लोगों को हाईकोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट जाने का अधिकार है.

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