अग्निवेश कर रहे हैं नक्सलियों से बात

Image caption पिछले दिनों नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ में एक बस को उड़ा दिया था जिसमें 40 से ज़्यादा लोग मारे गए थे.

मानवाधिकार कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश ने बीबीसी को बताया है कि उन्होंने सरकार के साथ संघर्षविराम के लिए माओवादियों के साथ कई दौर की बातचीत की है.

गृहमंत्री पी चिदंबरम ने स्वामी अग्निवेश से माओवादियों के साथ बातचीत शुरू करने का अनुरोध किया था.

स्वामी अग्निवेश को चिदंबरम की ओर से लिखे एक पत्र की प्रति बीबीसी के पास है जिसमें उन्होंने कहा है कि सरकार माओवादियों के साथ बातचीत के लिए तैयार है अगर माओवादी 72 घंटों तक हिंसा छोड़ दें.

इस पत्र में चिदंबरम ने माओवादियों के साथ शांति वार्ता के लिए एक खाका या रोडमैप प्रस्तुत किया है.

पत्र के कुछ मुख्य अंश इस प्रकार हैं:

  • यदि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) 72 घंटे के लिए हिंसा की कार्रवाइयाँ बंद करदे तो उस दौरान सुरक्षा बल माओवादियों के ख़िलाफ़ कोई अभियान नहीं चलाएँगे.
  • केंद्र सरकार माओवादियों को आमंत्रित करने और शांति वार्ता शुरू कराने के लिए प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों से विचार-विमर्श करेगी. यह प्रक्रिया की तभी शुरुआत होगी जब माओवादी संघर्षविराम के लिए किसी तारीख़ की घोषणा कर देंगे.
  • संघर्षविराम के लिए माओवादियों को हिंसा छोड़नी होगी.

स्वामी अग्निवेश ने बीबीसी को बताया कि उनकी माओवादियों के प्रतिनिधि के साथ छह बार बातचीत हुई है.

उन्होंने बातचीत को काफ़ी सकारात्मक बताया.

उन्होंने कहा कि माओवादियों को गृहमंत्री पर भरोसा करना चाहिए कि सुरक्षाबल संघर्षविराम का उल्लंघन नहीं करेंगे.

माओवादियों ने स्वागत किया

माओवादियों ने एक प्रेस विज्ञप्ति के ज़रिए दिल्ली स्थित माओवादी समर्थक जीएन साईबाबा को शांति वार्ता के लिए अपना दूत नियुक्त किया है.

साईबाबा ने बीबीसी को बताया कि उनकी स्वामी अग्निवेश से बातचीत हुई है और चिदंबरम की योजना में दो “सकारात्मक पहलू” हैं.

सरकार के कदम का स्वागत करते हुए साईबाबा ने कहा कि दोनों पक्षों की ओर से संघर्षविराम की स्थिति में सरकार का सैनिक अभियान ख़त्म करने का आश्वासन एक “स्वागत योग्य कदम” है.

साथ ही बातचीत की शुरूआत के लिए एक योजनाबद्ध निमंत्रण भी एक अच्छा कदम है.

उनका कहना है कि सरकार जानीमानी हस्तियों की मौजूदगी में माओवादियों के साथ एक संघर्षविराम समझौते पर हस्ताक्षर करे.

लेकिन साथ ही उनकी कुछ शंकाएं भी हैं.

Image caption चिदंबरम ने एक पत्र में अपने रोडमैप का ब्यौरा पेश किया है.

उनका कहना है कि सरकार शांति वार्ता और संघर्ष दोनों की ही बात कर रही है.

माओवादियों के एक प्रवक्ता ने जंगल में स्थित अपने ठिकाने से बात करते हुए बीबीसी से कहा, "मीडिया में इस तरह की रिपोर्टें हैं कि रक्षा मंत्री सैन्य प्रमुखों से बातचीत कर रहे हैं कि मध्य भारत में अर्धसैनिक बलों की जगह सेना का इस्तेमाल किया जाए".

उन्होंने कहा कि माओवादी नेतृत्व एक सुर में इस तरह की दोहरी नीति की भर्त्सना करता है.

माओवादियों की मांग है कि बातचीत के लिए जेल में बंद उनके साथियों को रिहा किया जाए.

माओवादी सूत्रों ने बीबीसी को बताया कि 72 घंटे के संघर्षविराम में कुछ नहीं हासिल होगा और इसे बढ़ाया जाए. साथ ही सरकार सैनिक अभियान बंद कर दे जिससे माओवादी नेता आपस में बातचीत की रूपरेखा तय करने के लिए खुलकर घूम सकें.

दोनों ही पक्ष में एक दूसरे के प्रति विश्वास की कमी है.

पिछले कुछ हफ़्तों में कई बड़ी हिंसा की वारदातें हुई हैं जिसके बाद सरकार पर माओवादियों के ख़िलाफ़ कड़ा रूख अपनाने के लिए ख़ासा दबाव पड़ा है.

लेकिन सरकार में एक ये सोच भी है कि माओवादी समस्या से निपटने के लिए केवल बल का सहारा नहीं लिया जा सकता.

माओवादी सूत्रों ने बीबीसी से बातचीत में इस बात की पुष्टि की कि उनके शीर्ष नेतृत्व को पत्र मिल गया है और वे 'कुछ दिन में इसका जवाब देंगे'.

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