संदेह था पर रिहा कर दिया

Image caption पश्चिम बंगाल पुलिस का कहना है कि रेल दुर्घटना के पीछे माओवादियों का हाथ है

पश्चिम बंगाल में हाल की रेल दुर्घटना में तोड़फोड़ के लिए उमाकांत महतो ज़िम्मेदार माने जा रहे हैं, उन्हें छह महीने पहले 'रहस्यमय ढंग' से रिहा कर दिया गया था.

इस दुर्घटना में लगभग 150 लोग मारे गए थे और लगभग 100 लोग अब भी अस्पतालों में भर्ती हैं.

पश्चिम बंगाल के पुलिस प्रमुख भूपिंदर सिंह कहते हैं कि माओवादियों के नजदीकी लोग इस तोड़फोड़ के लिए ज़िम्मेदार हैं.

रेल अधिकारियों का कहना है कि पटरियों को जोड़ने वाली क्लिप गायब थी जिसकी वजह से ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस पटरी से उतर गई और उससे मालगाड़ी जा टकराई.

पश्चिम बंगाल पुलिस प्रमुख ने इस तोड़फोड़ के लिए पीपुल्स कमेटी फोर प्रवेंशन ऑफ़ एट्रोसिटीज़ (पीसीपीए) के दो स्थानीय नेताओं उमाकांत महतो और बापी महतो को प्रमुख संदिग्ध बताया है.

भूपिंदर सिंह का कहना है,''इन दोनों ने स्थानीय लोगों को हथौड़े और अन्य औजारों के साथ रेलवे ट्रेक को काटने के लिए जमा किया. उन्होंने एक लाइनमैन को रेल पटरियों को जोड़नेवाली क्लिप को खोलने के लिए बाध्य किया जिसकी वजह से इसी स्थान पर दुर्घटना हुई. ये सुनियोजित साजिश थी.''

रहस्यमय रिहाई

लेकिन पुलिस और अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार उमाकांत महतो को पिछले साल जून में गिरफ़्तार किया गया था और उनके ख़िलाफ़ देश के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ने का आरोप लगाया था, उन्हें गिरफ़्तार किए जाने के पाँच महीने बाद दिसंबर में 'रहस्यमय तरीके' से रिहा कर दिया गया था.

क़ानूनी जानकार कहते हैं कि किसी को ग़ैरक़ानूनी गतिविधि निरोधक क़ानून के तहत पकड़ने के बाद ज़मानत पर रिहा किया जाना बेहद अप्रत्याशित है.

वकील किशोर बागची कहते हैं,''राजद्रोह के आरोप में किसी को बंद करने के बाद उसे इसी बिना पर रिहा किया जाता है कि वे पुलिस को सहयोग करेंगे अथवा मुखबिर बन जाएंगे. पुलिस के पास इस बात की अच्छी वजह होंगी कि उमाकांत ऐसा करेंगे.''

ऐसा ही एक माओवादी नेता धनपति महतो के साथ हुआ.

बागची कहते हैं,''ये इसलिए हुआ कि पुलिस ने अभियुक्तों की ज़मानत का विरोध नहीं किया और अदालत ने उन्हें रिहा कर दिया. आख़िरकार पुलिस ने माओवादियों से जुड़े वरिष्ठ नेता की ज़मानत का विरोध क्यों नहीं किया?''

ये स्पष्ट नहीं है कि ज़मानत के बाद पश्चिम बंगाल पुलिस की गुप्तचर सेवा का धनपति महतो और उमाकांत महतो से कोई संपर्क था या नहीं.

लेकिन इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि रिहा होने के बाद ये नेता फिर सक्रिय हो गए हों.

पश्चिम बंगाल पुलिस गुप्तचर इकाई के अधिकारी ने अपना नाम न बताने की शर्त पर बताया,''माओवादी नेताओं की जो बातचीत पकड़ में आई है, उसके अनुसार वो हथौड़े और छैनी जैसे उपकरणों की बात कर रहे थे. लेकिन वो कूट भाषा में बात कर रहे थे इसलिए हम लोग उनके स्थान और मकसद का पता नहीं लगा पाए.''

दूसरी ओर माओवादी नेताओं ने कहा है कि जिन लोगों का इस दुर्घटना के पीछे हाथ पाया गया, उनको सज़ा दी जाएगी.

माओवादियों के प्रवक्ता कामरेड आकाश ने बीबीसी से सोमवार को बातचीत में कहा था,''इस मामले की जाँच की जाएगी और दोषियों को सज़ा दी जाएगी.''

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