अमरीका ने दिए सकारात्मक संकेत

हिलेरी क्लिंटन और एस एम कृष्णा
Image caption ओबामा प्रशासन से पहले जॉर्ज बुश ने भी सुरक्षा परिषद में भारत की सदस्यता की वकालत की थी

अमरीका की विदेशमंत्री हिलेरी क्लिंटन ने कहा है कि जब भी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पुनर्गठन की बात होगी तो भारत की बढ़ती हुई ताक़त भी एक अहम मुद्दा होगा.

वॉशिंगटन पहुँचे भारत के विदेश मंत्री एसएम कृष्णा के साथ वार्ता शुरु होने से पहले एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में हिलेरी क्लिंटन के इस बयान को सुरक्षा परिषद सदस्यता के लिए भारत की दावेदारी के लिए अमरीका से मिलने वाले समर्थन के संकेत के रूप में देखा जा रहा है.

हिलेरी क्लिंटन ने कहा कि भारत और अमरीका के संबंध बहुत गहरे हैं और 21वीं सदी कैसी होगी ये बहुत हद तक इन दोनों देशों के आपसी रिश्तों पर निर्भर करता है.

उन्होंने साफ़ किया है कि अमरीका भारत को पाकिस्तान के नज़रिए से नहीं देखता.

अफ़ग़ानिस्तान में भारत

उन्होंने कहा कि अमरीका भारत के साथ रिश्ते को पाकिस्तान या अफ़ग़ानिस्तान के संदर्भ में नहीं देखता है और अफ़गानिस्तान में भारत की मौजूदगी की उन्होंने जमकर सराहना की.

अफ़ग़ानिस्तान में भारत के रोल का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि भारत अफ़ग़ानिस्तान में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.

भारत ने अफ़ग़ानिस्तान के विकास में एक अरब तीस करोड़ डालर ख़र्च किए हैं. भारत अफ़ग़ान संसद की नई इमारत बना रहा है, वहाँ की सड़कें बना रहा है और बिजली का ढाँचा खड़ा कर रहा है.

जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में भारत के ज़रिए उठाए गए क़दमों की तारीफ़ करते हुए क्लिंटन ने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा के लिए अमरीका और भारत मिलकर काम कर रहे है जिससे जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होगी.

क्लिंटन ने कहा कि खाद्य सुरक्षा का मामला भी इससे जुड़ा है और इस क्षेत्र में भी अमरीका और भारत आपस में सहयोग कर रहे हैं.

भारत की आर्थिक उन्नति का ख़ास ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जब सारी दुनिया आर्थिक मंदी का शिकार बन रही थी वैसी स्थिति में भारतीय अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन उत्कृष्ट है.

क्लिंटन ने कहा कि भारत के साथ संबंधों को वो निजी प्राथमिकता देती हैं.

इस मौक़े पर भारत के विदेश मंत्री एस एम कृष्णा ने कहा कि भारत और अमरीका के आपसी रिश्ते से होने वाले फ़ायदे की कोई सीमा नहीं है.

कृष्णा के मुताबिक़ ये सामरिक वार्ता भारत और अमरीका के गहरे रिश्ते को दर्शाता है और कई वैश्विक मुद्दों पर भारत और अमरीका की सोच एक जैसी है.

बातचीत शुरु होने से पहले कृष्णा ने विश्वास जताया कि इससे दोनों देशों के संबंधों में नए आयाम स्थापित होंगे.

अमरीका-भारत व्यापार परिषद [यूएसआईबीसी] के 35वें सम्मेलन को संबोधित करते हुए कृष्णा ने कहा कि हम उन सभी बिंदुओं पर चर्चा करेंगे जिनसे हमारे हित जुड़े हैं.

वार्ता के दौरान आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष, परमाणु सुरक्षा को अत्याधुनिक बनाने, वैश्विक लक्ष्यों के लिए मिलकर काम करने और एशिया व अफगानिस्तान के मद्देनजर भी बातचीत की जाएगी.

कृष्णा ने कहा कि यह वार्ता हमारे अब तक के सफर को प्रदर्शित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है.

विदेश मंत्री कृष्णा के साथ भारतीय प्रतिनिधिमंडल में मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल, योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री पृथ्वीराज चव्हाण, विदेश सचिव निरूपमा राव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं.

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