प्रतिभाशाली श्रेया के लिए अभियान

श्रेया

मुंबई के पूर्वी बांद्रा स्थित एलबीएच कॉलेज ऑफ़ आर्किटेक्चर की छात्रा श्रेया के बनाए स्केच और प्रोजेक्ट्स उनके कॉलेज में और उसके बाहर भी सराहे जाते हैं.

कंप्यूटर की सुविधा होने के बावजूद भी वो हाथों ही से स्केच बनाया करती थीं.

श्रेया पश्चिम बंगाल में हाल में हुए ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गई थीं और उस ट्रेन हादसे के दौरान आई गंभीर चोट की वजह से डॉक्टरों को उनका दाहिना हाथ काटना पड़ा है.

एक साल में श्रेया की पढ़ाई पूरी होने वाली थी. लेकिन उनका हाथ काटे जाने की ख़बर से श्रेया के कॉलेज में सभी जैसे सदमे में हैं और वो श्रेया की आर्थिक मदद के लिए धन एकत्र करने में जुटे हैं. श्रेया अभी कोलकाता के एक अस्पताल में भर्ती हैं.

'मेरे बचने की संभावना नहीं है'

श्रेया के क़रीबी रिश्तेदार इंद्रनील रॉय ने कोलकाता से बीबीसी को बताया कि श्रेया को मलबे के नीचे से बचाया गया था. वो अपनी माँ और भाई के साथ कोलकाता से मुंबई आ रही थीं. वो कहते हैं, "श्रेया ने अपनी माँ से कहा कि आप मुझे छोड़ दीजिए क्योंकि मेरे बचने की कोई संभावना नहीं है, लेकिन सुरक्षाकर्मियों की मदद से श्रेया को बाहर निकाला गया. उस वक्त श्रेया का हाथ टूट चुका था."

श्रेया पर कई ऑपरेशन हो चुके हैं. इंद्रनील ने बताया कि दवाईयों की वजह से श्रेया थोड़ी देर होश में रहने के बाद फिर बेहोश हो जाती हैं.

कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉक्टर कृष्णभूषण महाशब्दे नासिक में थे जब उन्होंने रेल हादसे के टीवी कवरेज के दौरान 22 वर्षीय श्रेया का नाम टीवी स्क्रीन पर देखा था.

मुंबई पहुँचकर उन्होंने छात्रों और अध्यापकों की बैठक बुलाई और श्रेया की मदद करने पर विचार किया. श्रेया के बारे में बात करते हुए वो भावुक हो उठते हैं.

डॉक्टर कृष्णभूषण महाशब्दे कहते हैं, "वो हमारी सबसे अच्छी छात्रा है. मैं उसके भविष्य को लेकर चिंतित हूँ. हमारे कॉलेज में करीब 400 छात्र हैं. हमने सोचा है कि हर छात्र श्रेया के लिए 100 रुपए दे ताकि श्रेया की मदद की जा सके."

उनका कहना है. "श्रेया के परिवारवालों ने हमें बताया कि इलाज के लिए पैसे की सख़्त ज़रूरत है. श्रेया मध्यमवर्गीय परिवार से है. ऑपरेशन के बाद श्रेया को नकली अंग जैसा रोबोटिक या मशीनी हाथ देना पड़ेगा. डॉक्टरों ने हमें बताया कि पूरे इलाज में 70 लाख से एक करोड़ रुपए का खर्चा हो सकता है."

'लाखों रुपए का ख़र्च'

उधर इंद्रनील का कहना था, "रोबोटिक हाथ की बात करना बहुत जल्दबाज़ी होगी. श्रेया आर्किटेक्चर की छात्रा हैं और हमने सुना है कि इस तकनीक की वजह से वो अपनी उंगलियाँ हिला पाएंगी. जहाँ तक मुझे पता है, इसकी कीमत 70 से 80 लाख के आसपास है. श्रेया के पिता ने अभी खुद ही रिटायरमेंट लिया है. उनकी माँ परिवार की खर्च चलाती हैं. ये उनके लिए भी बेहद मुश्किल होगा."

उन्होंने बताया कि सरकार से उन्हें किसी तरह की मदद नहीं मिल पाई है. डॉक्टर महाशब्दे कहते हैं कि हालांकि उनकी बात श्रेया से नहीं हो पाई है लेकिन उनके परिवारवालों ने उनकी बात श्रेया तक पहुँचा दी है कि सारा कॉलेज उसके साथ है.

कॉलेज में सभी श्रेया के अच्छे होने की कामना कर रहे हैं.

श्रेया की एक साल जूनियर श्रीति दास कहती हैं कि उन्हें इस घटना पर विश्वास नहीं हो रहा है. वे कहती हैं, "उनके बनाए प्रोजेक्ट्स की लोग तारीफ़ करते नहीं थकते. लोग पूछते थे कि ये स्केच किसने बनाया है. सबसे ज़्यादा मुझे इस बात से धक्का पहुँचा है कि उनका दाहिना हाथ काटना पड़ा है. वो बेहद अच्छे स्वभाव की थीं और मेहनत से अपना काम करती थीं."

फ़ेसबुक पर भी ‘श्रेया सपोर्ट ग्रुप’ नाम से एक ग्रुप बनाया गया है जो उसकी मदद के लिए हर संभव प्रयास करने की कोशिश कर रहा है.

संबंधित समाचार