राठौर को ज़मानत 29 तक नहीं

रुचिका
Image caption रुचिका ने वर्ष 1993 में आत्महत्या कर ली थी

पंजाब और हरियाण हाई कोर्ट ने रुचिका गिरहोत्रा से छेड़छाड़ के मामले में सज़ा पाने वाले हरियाणा के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) एसपीएस राठौर की जम़ानत याचिका पर सुनवाई को 29 जून तक के लिए टाल दिया है.

हाईकोर्ट के वैकेशन जज अजय तिवारी ने कहा है कि चूंकि एसपीएस राठौर एक 'घृणित अपराध' के लिए दोषी पाए गए हैं इसलिए उनकी ज़मानत का मामला हाईकोर्ट के उपयुक्त पीठ के सामने रखा जाना चाहिए.

इसका मतलब यह है कि पूर्व पुलिस महानिदेशक को अब लगभग पूरे महीने अभी जेल ही में रहना होगा.

उल्लेखनीय है कि पिछले 25 मई को चंडीगढ़ की एक निचली अदालत ने एसपीएस राठौर की सज़ा छह महीने से बढ़कर डेढ़ साल कर दी थी.

अदालत के फ़ैसले के तुरंत बाद राठौर को हिरासत में ले लिया गया था और फिर उन्हें बुड़ैल की जेल में भेज दिया गया था.

बुधवार को राठौर की पत्नी आभा राठौर ने अपने पति की ओर से पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में निचली अदालत के फ़ैसले पर समीक्षा याचिका दायर की थी.

मामला

ग़ौरतलब है कि सीबीआई की विशेष अदालत ने एसपीएस राठौर को पिछले साल दिसंबर में छह महीने की सज़ा सुनाई थी.

इस फ़ैसले को बहुत कम बताते हुए रुचिका गिरहोत्रा के परिजनों और सीबीआई दोनों ने अदालत में अलग-अलग याचिका लगाई थी जिस पर सुनवाई के बाद यह फ़ैसला सुनाया गया है.

इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ एसपीएस राठौर ने भी अपील की थी लेकिन अदालत ने उसे ख़ारिज कर दिया.

यह मामला 20 साल पुराना है.

अगस्त 1990 में 14 वर्षीय टेनिस खिलाड़ी रुचिका गिरहोत्रा के साथ छेड़छाड़ का मामला प्रकाश में आया था. उस समय एसपीएस राठौर हरियाणा पुलिस में महानिरीक्षक थे और साथ ही पंचकुला में हरियाणा लॉन टेनिस एसोसिएशन के अध्यक्ष भी थे.

इस घटना के तीन साल बाद अगस्त, 1993 में रुचिका ने आत्महत्या कर ली थी.

एसपीएस राठौर पर आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में दो और नए मामले दर्ज किए गए हैं लेकिन उन दोनों मामलों में अभी आरोप पत्र दाखिल नहीं किया गया है.

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