गंदगी से परेशान श्रीनगर

श्रीनगर में कूड़े का ढेर

श्रीनगर को भारत का चौथा सबसे गंदा शहर घोषित हुए एक महीना गुज़र गया है लेकिन अब तक स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है. लोग इस पर शर्मिंदा भी हैं और गुस्से में भी.

श्रीनगर के निवासी मोहम्मद अशरफ़ का कहना है, “हमारी घाटी को धरती का स्वर्ग माना जाता है लेकिन हमारा शहर गंदगी में चौथे स्थान पर है. ये सुनकर सर शर्म से झुक जाता है.”

भारत के केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के एक सर्वेक्षण से पता चला है कि सफ़ाई की लिहाज़ से श्रीनगर देश का चौथा सबसे गंदा शहर है लेकिन श्रीनगर से अधिक गंदे तीन शहरों में से कोई भी किसी प्रदेश की राजधानी नहीं है.

कारण

केंद्रीय सरकार की सर्वे रिपोर्ट में श्रीनगर को गंदा शहर घोषित करने कई कारण बताए गए हैं. इन में एक ये है कि यहां 'ड्राइ लेटरिन' का संख्या बहुत अधिक है और शहर के सफ़ाई कर्मचारियों के पास इससे निबटने के लिए सामान नहीं है.

दूसरी वजह ये बताई गई है कि श्रीनगर में पानी के निकास की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है और ना ही कोई 'सीवरेज सिस्टम' मौजूद है.

मंत्रालय की रिपोर्ट में ये भी लिखा गया है कि शहर में वितरित किया जा रहा पीने का पानी पीने योग्य नहीं है. साथ ही नदियों और झीलों का पानी गंदा है.

केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय की रिपोर्ट सर्वजनिक होने के बाद मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला ने इस धब्बे को मिटाने की बात कही थी. उप-मुख्यमंत्री तारा चंद का कहना है कि शहर के सीवेज और मल को नदियों और झील में जाने से रोकने के लिए पहले ही परियोजनाओं पर काम चल रहा है.

इन परियोजनाओं के अंतर्गत नए सीवर्स का निर्माण किया जा रहा है और डल झील के आस-पास कम से कम तीन सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बन भी चुके हैं.

लेकिन शहर के रेसीडेंसी रोड जैसे इलाक़ों में अब भी कूड़ा-कर्कट मौजूद है. रेसीडेंसी रोड पर पोलो ग्राउंड के निकट गंदगी का एक बहुत बड़ा ढेर है.

एक युवा आबिद अहमद कहते हैं, “अगर कोई व्यक्ति पांच मिनट इस जगह रुके तो उसकी मौत हो सकती है.”

प्रयास

श्रीनगर नगर पालिका के सफ़ाई कर्मचारी आजकल कूड़ा जमा करके या तो इसे सड़क के किनारे जलाकर माहौल को और गंदा कर रहे हैं या फिर ये कूड़ा दोपहर तक वहीं पड़ा रहता है.

Image caption विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर गंदगी के ख़िलाफ़ विरोध करते युवा

इस गंदगी से स्कूल भी नहीं बचे हैं. शहर के दुर्गियां हाइ स्कूल के बाहर भी कूड़ा जमा है. इस स्कूल की एक छात्रा रिफ़त कहती हैं, “इस कूड़े की बदबू हमारे क्लासरूम में आती है. इससे हमारी पढ़ाई में ख़लल पड़ता है.”

उप-मुख्यमंत्री तारा चंद कहते हैं कि शहर के 13 वार्डों में सफ़ाई का काम ठेके पर देने का निर्णय लिया गया है. इसके साथ ही नगर पालिका में और लोगों को भर्ती किया जा रहा है. पालिका के कर्मचारियों को आवश्यक सामान भी उपलब्ध करवाया जा रहा है.

उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार कूड़े-कर्कट को वैज्ञानिक ढंग से नष्ट करने के लिए एक परियोजना पर काम शुरु कर चुकी है जिसके लिए एशियन डेवलेपमेंट बैंक से बीस करोड़ रुपए की सहायता उपलब्ध होगी.

लेकिन क्या नगर पालिका के सफ़ाई कर्मचारी सह समय पर काम पर हाज़िर होंगे, इस बारे में संदेह है. आजकल स्थिति ये है कि शहर में स्कूल सुबह साढ़े आठ बजे खुलते हैं लेकिन सफ़ाई कर्मचारी उसके बाद ही काम पर आते हैं.

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