उम्मीद है भारत से रिश्तों पर असर नहीं होगा: अमरीका

भोपाल गैस पीड़ित
Image caption भोपाल गैस त्रास्दी मामले में 25 साल बाद फ़ैसला आया है

भोपाल गैस कांड में दोषियों को दो-दो साल की सज़ा सुनाए जाने के फ़ैसले की भारत में कड़ी आलोचना हुई है. उधर अमरीका ने उम्मीद जताई है कि अब इस मामले से भारत-अमरीका संबंधों पर असर नहीं पड़ेगा और न्यायिक फ़ैसले के बाद प्रभावित परिवार इस मामले को बंद कर पाएँगे.

भारत के लगभग सभी राजनीतिक दलों की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं हैं और दलों ने इस फ़ैसले पर असंतोष ज़ाहिर किया है.

प्रभावित लोगों ने भी अपनी नाराज़गी व्यक्त की है और इस मामले से जुड़े भारतीय संगठनों और कार्यकर्ताओं ने भी सज़ा को अपर्याप्त बताया है.

अमरीका में संवाददाताओं से बातचीत के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता फ़िलिप क्रॉली ने कहा, "स्पष्ट है कि ये मानव इतिहास में सबसे भीषण औद्योगिक त्रास्दी थी. हमें उम्मीद है कि फ़ैसले के बाद प्रभावित लोगों और उनके परिवारों को इस मामले को अब बंद करने में मदद मिलेगी."

फ़िलिप क्रॉली का कहना था, "पिछले हफ़्ते हमारी भारत से रणनीतिक साझेदारी पर बात हुई है....हमारे देशों और अर्थव्यवस्ताओं में क़रीबी रिश्ते हैं. मैं उम्मीद करता हूँ कि इस मामले से (भोपाल त्रास्दी) दोनों देशों के बीच आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनितिक संबंधों में कोई अड़चनें नहीं आएँगी."

दूसरी ओर अमरीका स्थित यूनियन कार्बाइड ने भी बयान जारी किया है.

बयान में कहा गया है - "यूनियन कार्बाइड और उसके अधिकारी इस मामले का हिस्सा नहीं थे क्योंकि इस बारे में मामले अलग-अलग कर दिए गए थे. यूनियन कार्बाइड और उसके अधिकारी भारतीय अदालत के कार्यक्षेत्र में नहीं आते क्योंकि उनका इस कारखाने को चलाने से कोई संबंध नहीं था. कारखाने की मिलकियत और कामकाज यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड देख रही थी."

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