ईरान मुद्दे पर सुरक्षा परिषद में आज मतदान

ईरान पर संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध
Image caption ईरान पर सबसे कड़े प्रतिबंध की तैयारी

ईरान के परमाणु कार्यक्रम के संबंध में उसके ख़िलाफ़ चौथे दौर के प्रतिबंध लगाने के प्रस्ताव पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बुधवार को मतदान होगा.

ईरान के ख़िलाफ़ ये प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव उसके संयुक्त राष्ट्र की शर्तों को लागू न करने के कारण लाया जा रहा है.

अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने कहा है कि ये ईरान के विरुद्ध सबसे ज़्यादा प्रभावी प्रतिबंध होंगे.

लेकिन ईरान के राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद ने कहा है कि अगर नए प्रतिवंध लगाए गए तो ईरान परमाणु मुद्दे पर आगे बातचीत के लिए तैयार नहीं होगा.

पश्चिमी देशों का आरोप है कि ईरान गुप्त तौर पर परमाणु बम बनाने का प्रयास कर रहा है जबकि ईरान ने बार-बार कहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल ऊर्जा के शांतिपूर्ण इस्तेमाल के लिए है.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि संभावना है कि प्रस्ताव पारित हो सकता है चाहे तुर्की और ब्राज़ील इसका विरोध कर रहे हैं. उनका मानना है कि इससे ईरान के साथ वार्ता के दौरान बना भरोसा भंग हो जाएगा.

प्रस्ताव में कड़े प्रावधान

अहमदीनेजाद ने ये भी कहा कि तुर्की औऱ ब्राज़ील की मदद से यूरेनियम अदला-बदली का जो समझौता हुआ था वो ईरान की तरफ़ से एक प्रस्ताव था जिसे नए प्रतिबंध की हालत में दोहराया नहीं जाएगा.

पिछले महीने मई में हुए समझौते के तहत ईरान 1200 किलो कच्चा यूरेनियम तुर्की भेजेगा जिसके बदले उसे एक साल के अंदर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ओर से 120 किलो संवर्द्धित यूरेनियम मिलेगा लेकिन अमरीका और उसके सहयोगियों ने इसे ये कहकर ठुकरा दिया था कि ये बहुत देर से उठाया गया क़दम है.

इससे पहले ईरान पर तीन बार प्रतिबंध लग चुके हैं. नए प्रतिबंधों का उद्देश्य भी ईरान को यूरेनियम के संवर्द्धन से रोकने के लिए दबाव डालना है.

प्रस्तावित प्रतिबंधों के तहत ईरान हेलिकॉप्टर और मिसाइल समेत कई तरह के हथियार नहीं ख़रीद सकेगा.

इसके अलावा तमाम देशों को अपने हवाई अड्डों और बंदरगाहों पर कार्गो का निरिक्षण करना होगा ताकि ईरान से किसी प्रतिबंधित समान की आवाजाही ना हो सके.

यदि विदेशों में चल रहे ईरानी बैंको पर परमाणु कार्यक्रम में शामिल होने का शक हो तो उनका लाइसेंस रद्द हो सकता है.

हिलेरी क्लिंटन नए प्रतिबंध को लेकर काफ़ी उत्साहित हैं जिन्हें सुरक्षा परिषद के पांचों स्थाई सदस्यों का समर्थन हासिल है.

क्यूटो में एक संवाददाता सम्मेलन में हिलेरी ने कहा कि 'अंतराष्ट्रीय समुदाए ने इस मुद्दे पर जो एक जुटता दिखाई है वो बहुत महत्वपूर्ण है.'

ब्राज़ील और तुर्की का विरोध

लेकिन ब्राज़ील और तुर्की ने कहा है कि नए प्रतिबंध ईरान के साथ बातचीत के तमाम प्रयासों को ख़त्म कर देंगे.

न्यूयार्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में बीबीसी संवाददाता बारबारा प्लेट का कहना है कि ब्राज़ील और तुर्की की आपत्ति के बावजूद इसमें कोई शक नहीं कि प्रस्ताव पारित हो जाएगा.

तुर्की, ब्राज़ील और लेबनान प्रस्ताव का समर्थन नहीं करेंगे लेकिन उनके पास प्रस्ताव को वीटो करने का अधिकार नहीं है. पश्चिमी देशों के राजनयिकों को उम्मीद है कि 15 सदस्यों वाली सुरक्षा परिषद में से 12 देश प्रस्ताव का समर्थन करेंगे.

तुर्की के शहर इस्तांबुल में एक क्षेत्रीय शिखर सम्मेलन में भाग लेने गए ईरानी राष्ट्रपति अहमदीनेजाद ने कहा है कि अगर अमरीका अपना रुख़ नहीं बदलता है तो इसका सबसे ज़्यादा नुक़सान अमरीकी राष्ट्रपति ओबामा और अमरीकी जनता को होगा.

अहमदीनेजाद ने रूस से भी 'ईरान के दुश्मनों' का साथ ना देने की अपील की है. अहमदीनेजाद का ये बयान उनकी रूस के प्रधानमंत्री व्लादिमीर पुतिन से मुलाक़ात से ठीक पहले आया है.

संबंधित समाचार