पुलिस ने बुज़ुर्ग को पेड़ पर लटकाया

जयराम पर अत्याचार

राजस्थान के धौलपुर ज़िले में पुलिस ने 75 साल के एक बुज़ुर्ग से चोरी का राज़ उगलवाने के लिए उसे पेड़ से लटका दिया.

पुलिस ज़्यादती का ये मामला सामने आया तो सरकार ने थानेदार को निलंबित कर दिया और मामले की जाँच का आदेश भी दे दिया है.

बात डेढ़ लाख रूपए के सामान की चोरी की थी.

ये घटना ऐसे समय सामने आई है जब राज्य के सीकर ज़िले में पुलिस हिरासत में एक व्यक्ति की मौत की ख़बर आई थी और सरकार ने एक थानेदार को निलंबत कर अभी राहत की सांस ली ही थी.

सरकार ने कहा है कि अगर हिरासत में कोई मौत हुई तो थानेदार ज़िम्मेदार होगा और उसे हाथों-हाथ निलंबित कर दिया जाएगा.

ज़्यादती

यूँ तो धौलपुर के सेपावू थाने में पुलिस वालों ने चोरी का सुराग़ पाने के लिए रस्सी से बांध कर लटका दिया.

पछत्तर वर्षीय जयराम दौसा ज़िले के एक गाँव के निवासी हैं. चोरी के एक मामले में पूछताछ के लिए पुलिस धौलपुर ले गई थी. यहीं से जयराम के साथ ज़्यादती की दास्ताँ शुरू हुई.

जयराम पेड़ से लटके

जयराम के साथ हुए सलूक ने पुलिस के अत्याचार की सूची लंबी कर दी है

चश्मदीद गवाहों के मुताबिक़ जयराम की चीख़ और पुकार किसी ने भी नहीं सुनी. मगर एक छायाकार ने इसे अपने कैमरे में क़ैद कर लिया.

घटनास्थल से लौटे धोलपुर के पुलिस अधीक्षक सुरेंद्र कुमार ने बीबीसी को बताया कि थानेदार राजेंदर कविया को तुरंत निलंबित कर दिया गया है.

उन्होंने कहा, ''हमने पीड़ित की मेडिकल जांच करवाई है. उसकी हालत ठीक है. एक गिरफ़्तार व्यक्ति को जो सुविधाएं क़ानूनन दी जाती हैं वो सब जयराम को उपलब्ध कराइ गई हैं. मैं पीड़ित से मिलकर लौटा हूँ, मामले की जाँच का काम अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को सौंपी गया है."

उधर राज्य के सीकर ज़िले में रींगस थाने में चोरी के आरोप में थाने लाए गए श्रीराम माली की संदिग्ध हालत में मौत हो गई थी. उसके परिजनों ने श्रीराम को थाने में यातनाएँ देने का अरोप लगाया है.

सरकार ने इस मामले की एक न्यायिक अधिकारी को जाँच के आदेश दिए हैं और थानाधिकारी को निलंबित कर दिया गया है.

इस घटना के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलौत ने अधिकारियों से कहा कि थाने में किसी व्यक्ति की जान चली जाना बहुत गंभीर मामला होता है. आइंदा ऐसा होगा तो थानेदार को ज़िम्मेदार माना जाएगा और उसे तुरंत निलंबित कर दिया जाएगा.

उन्होंने कहा है कि ऐसी हर घटना की जाँच एक न्यायिक अधिकारी से कराई जाएगी. पहले ऐसे मामलों में महज़ विभागीय जाँच की जाती थी.

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