किर्गिस्तान में हिंसा जारी, 100 मरे

Image caption हिंसा के शिकार लोग उज़्बेकिस्तान जा रहे हैं

रूस के राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव के आदेश के बाद मध्य एशियाई देश किर्गिस्तान में रुसी सेना के तीन सौ से ज़्यादा जवान पहुंच गए हैं.

इन जवानों को राजधानी बिश्केक से सटे रुसी सैन्य ठिकानों की रक्षा के लिए भेजा गया है.

किर्गिस्तान की अंतरिम सरकार ने नस्ली हिंसा से निपटने के लिए रूस से दोबारा सैन्य मदद की अपील की थी.

ओश शहर में शुरू हुई नस्ली हिंसा अब धीरे-धीरे पूरे दक्षिणी इलाकों में बढ़ती जा रही है.

लेकिन बीबीसी के मॉस्को संवाददाता रिचर्ड गल्पिन का कहना है कि रूस ने जो सेना भेजी है उसका मक़सद ख़ुद उसके सैन्य ठिकानों की रक्षा करना है न कि किर्गिस्तान में शांति बहाल करना.

रूसी अधिकारियों का कहना है कि सेना की दो कंपनियां किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक से सटे रूसी एयरबेस के लिए रवाना हो चुकी हैं.

रूसी अधिकारियों के मुताबिक़ उनकी भूमिका एयरबेस की सुरक्षा के साथ-साथ वहां तैनात सैनिकों और उनके परिवारों की हिफ़ाज़त करने की होगी.

हालांकि दक्षिणी शहर ओश और जलालाबाद में जारी नस्ली हिंसा के फ़िलहाल सैकड़ों किलोमीटर दूर स्थित राजधानी बिश्केक तक पहुंचने के कोई संकेत नहीं हैं. रूस ने नस्ली हिंसा रोकने के लिए सैन्य हस्तक्षेप की किर्गिज़ सरकार की अपील को मानने से इनकार कर दिया है.

रूस का कहना है कि वो किर्गिस्तान में अकेले हस्तक्षेप नहीं करना चाहता.

रूस के एक सांसद सर्गेई मार्कोव ने कहा, ''नस्ली हिंसा रोकने में रूस अगर किर्गिस्तान की मौजूदा सरकार की मदद कर सकता तो उसे बेहद ख़ुशी होती लेकिन रूस किर्गिस्तान में सीधे सैन्य कार्रवाई नहीं करना चाहता, उसे राजनीतिक और सैन्य ज़िम्मेदारियों में फंसने का डर है. रूस किर्गिस्तान को राजनीतिक और आर्थिक मदद देना चाहता है लेकिन ये तभी संभव होगा जब किर्गिज़ सरकार हालात को ख़ुद क़ाबू में कर ले. हालांकि रूस हालात पर नियंत्रण के लिए अनिश्चितकाल तक इंतजार भी नहीं करता रहेगा.''

सोमवार को रूस के नेतृत्व वाले क्षेत्रीय सुरक्षा संगठन की एक बैठक होनेवाली है जिसमें इस मुद्दे पर विचार किया जा सकता है.

किर्गिस्तान में किर्गिज़ और उज्बेक नागरिकों के बीच जारी नस्ली हिंसा में अब तक सौ लोग मारे गए हैं. और जान जाने के डर से हजारों लोगों ने पड़ोसी देश उज़बेकिस्तान में शरण ले रखी है.

अप्रैल में राष्ट्रपति कुरमानबेक बाकियेव को सत्ता से हटाए जाने के बाद हुई ये सबसे बड़ी हिंसा है. हालांकि बाकियेव ने इस हिंसा में किसी तरह का हाथ होने से पूरी तरह इनकार किया है.

किर्गिस्तान की कार्यवाहक राष्ट्रपति रोज़ा ओटुनबायेवा का कहना है कि मौजूदा नस्ली हिंसा के लिए कई शक्तियां ज़िम्मेदार हैं जिनमें वे लोग भी शामिल हैं जो किर्गिस्तान में अस्थिरता पैदा करना चाहते हैं और आगामी जनमत संग्रह में रुकावट पैदा करना चाहते हैं.

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