'सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देश का उल्लंघन'

जस्टिस दिनाकरन
Image caption जस्टिस शैलेंद्र की खंडपीठ ने मुख्य न्यायाधीश के प्रशासनिक अधिकारों पर सवाल उठाए थे

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक हाईकोर्ट के जजों और न्यायलय के कामकाज के बारे में हाईकोर्ट की ओर से दायर एक याचिक पर कहा है कि ऐसा प्रतीत होता है कि जस्टिस शैलेंद्र वाली खंडपीठ ने जजों और न्यायालय के प्रशासनिक कामकाज संबंधी सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों का उल्लंघन किया है.

सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी कर्नाटक हाईकोर्ट की उस याचिक की सुनवाई के दौरान की जिसमें जस्टिस शैलेंद्र वाली खंडपीठ ने कर्नाटक हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीश जस्टिस दिनाकरन के प्रशासनिक अधिकारों पर सवाल उठाए थे.

ग़ौरतलब है कि अनेक आरोप लगने के बाद मुख्य न्यायधीश जस्टिस पीडी दिनाकरन को हाईकोर्ट के न्यायिक कामकाज से मुक्त कर दिया गया है लेकिन वे हाईकोर्ट का प्रशासनिक कामकाज देख रहे हैं.

अंतरिम आदेशों पर रोक लगी

ग़ौरतलब है कि हाल में एक कर संबंधित मामला एक नई पीठ के सामने लिस्ट किया गया. लेकिन इसकी सुनवाई जस्टिस शैलेंद्र कुमार वाली खंडपीठ पहले कर चुकी थी.

इस पर जस्टिस शैलेंद्र कुमार और एन आनंद ने रजिस्ट्रार जनरल को तलब किया और न्यायालय में उन्हें फटकार लगाई थी.

इस पर आपत्ति जताते हुए कर्नाटक हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट में याचिक दायर की थी.

हाईकोर्ट का पक्ष रखते हुए सुप्रीम कोर्ट में वकील उदय होल्ला ने कहा, "खंडपीठ (जस्टिस शैलेंद्र कुमार वाली) रजिस्ट्रार जनरल और अन्य रजिस्ट्रार्स को बुलाती रही है और अपने सामने मामला न लिस्ट किए जाने पर आपत्ति जताती रही है...इसके अलावा मुख्य न्यायाधीश के बारे में न्यायालय में सार्वजनिक तौर पर अनुचित भाषा का इस्तेमाल किया गया है....ये लगातार चार दिन चलता रहा है.."

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस दीपक वर्मा और केएस राधाकृष्णन ने जस्टिस शैलेंद्र वाली खंठपीठ के कई अंतरिम आदेशों पर रोक लगा दी.

ये मामले न्यायलय के अंदरूनी कामकाज, नए खंडपीठ के गठन, उनके सामने आने वाले मामले से संबंधित हैं.

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