मुंबई में भारी बारिश, आठ मरे

बारिश
Image caption मुंबई में हर साल बारिश में मौतें होती हैं.

मुंबई में भारी बारिश हो रही है और बुधवार सुबहठाणें के एक इलाके में दीवार गिर जाने से आठ लोग मारे गए और कम से कम चार घायल हो गए.

यहाँ बारिश के दौरान ऐसी घटनाएं करीब-करीब हर साल होती हैं. इस साल भी मानसून के आने से पहले अधिकारियों ने कमज़ोर इमारतों की बातें की थीं, दौरे हुए, लेकिन घटनाएँ फिर भी जारी हैं.

मुंबई महानगरपालिका के आपदा प्रबंधन के सह-आयुक्त यश शिंडे कहते हैं कि प्रशासन की तरफ़ से पूरी कोताही नहीं बरती गई.

वो कहते हैं, ‘जहाँ तक कोई दीवार या इमारत गिरने से लोगों की मौत की घटनाएँ होती हैं, इनका मूल्यांकन करना भी मुश्किल हो जाता है. अगर घर की दीवारें कमज़ोर होती है तो हम रहनेवाले लोगों को नोटिस देते हैं लेकिन लोग फिर भी घर छोड़कर नहीं जाते हैं क्योंकि उनके पास रहने की और कोई जगह नहीं है.’

तो क्या ये माना जाए कि जब तक मॉनसून हैं, तब तक मौतों की सिलसिला जारी रहेगा. इस सवाल को वो टाल जाते हैं.

मुंबई में जिन हालातों में लोग रहते हैं ये किसी से छिपा नहीं है, लेकिन सवाल फिर वही कि सरकारी तंत्र क्या अपनी ज़िम्मेदारी निभा रहा है?

यही समझने हम पहुँचे बेहरामपाड़ा इलाके में. यहाँ गलियाँ इतनी संकरी हैं कि वहाँ धूप तक नहीं पहुँचती. बरसात यानी परेशानी में इज़ाफ़ा. एक तरफ़ पानी घरों में घुस रहा था तो दूसरी तरफ़ से बच्चे पानी को घरों से निकाल रहे थे. जिन ढाँचों में लोग रहकर जीवन व्यतीत कर रहे हैं, वो कब गिर जाएँ कुछ पता नहीं.

जब भी पानी बरसता है तो रफ़ीका के घर में गंदे पानी के साथ-साथ कीड़े भी घुस जाते हैं.

वो कहती हैं, ‘हम कमज़ोर घरों में रहते हैं. अभी हमारे सामने ही एक मकान गिरा है. हमारे घरों की दीवारों में दरार पड़ी है. हमने महानगरपालिका के लोगों से कई बार मिन्नतें की कि वो यहाँ के नालों को साफ़ करवा दें, लेकिन हमारी कोई सुनवाई नहीं है.

साथ की खोली में रहने वाली सायरा कहती हैं कि उन्हें पता नहीं कब उनकी खोली की दीवारें ढह जाएँ.

अस्मत बी भी कहती हैं कि वो अधिकारियों के वायदे सुनते-सुनते थक चुकी हैं.

घर बचाओ घर बनाओ आंदोलन से जुड़े सिंप्रीत सिंह के मुताबिक घरों की ऊँची कीमतों की वजह से मुंबई की 50 प्रतिशत से ज़्यादा आबादी को ऐसी जगह रहना पड़ रहा है जहाँ उन्हें नहीं रहना चाहिए.

वो कहते हैं, ‘लोग नाले के किनार, दीवारों के नज़दीक जैसी जगहों पर रहने को मजबूर हैं. कम कीमत पर घर बनाने के सरकारी वायदे खोखले ही साबित हुए हैं.’

उधर बारिश का मुंबई हवाई अड्डे के कामकाज पर भी असर पड़ा है. वहाँ से ख़बर ये कि उड़ानों में 30-45 मिनट की देरी हो रही है. दादर, हिंदमाता जैसी जगहों में पानी भरने की ख़बर है.

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