मक्का मस्जिद:अभियुक्त अदालत में पेश

तीन वर्ष पहले हैदराबाद की मक्का मस्जिद में हुए बम विस्फोट की छानबीन में गुरुवार को एक नई जान पड़ी जब इस केस के संबंध में सीबीआई ने दो संदिग्ध हिंदू चरमपंथियों को हैदराबाद की एक विशेष अदालत में पेश किया.

हिंदू कट्टरपंथी संगठन अभिनव भारत से संबंध रखने वाले देवेंदर गुप्ता और लोकेश शर्मा को सीबीआई का एक दल गुरुवार को हैदराबाद लाया जहाँ उन्हें अतिरिक्त चीफ़ मेट्रोपोलिटन जज की अदालत में पेश किया गया.

ये लोग अब तक अजमेर की दरगाह में विस्फोट के संबंध में अजमेर की जेल में थे.

हैदराबाद की नामपल्ली अदालत के परिसर को पुलिस ने चारों तरफ से घेर लिया था और मीडिया सहित किसी को अंदर जाने की अनुमति नहीं दी जा रही थी.

इन दोनों संदिग्धों की जान को खतरे की आशंका के मद्देनज़र वहां कड़ी सुरक्षा की गई थी. गुप्ता और शर्मा के चेहरों पर नकाब डाले गए थे और सुरक्षाकर्मी उन्हें चारों तरफ से घेरे हुए थे.

अदालत ने इन दोनों को 30 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया और उन्हें हैदराबाद की चंचलगुदा जेल भेजा गया.

सीबीआई के अधिकारियों का कहना है की वो इन दोनों को अपनी हिरासत में लेने के लिए अदालत में जल्द ही एक याचिका दाखिल करेंगे.

सीबीआई का कहना है की अजमेर की दरगाह की तरह यह दोनों मक्का मस्जिद में हुए विस्फोट में भी लिप्त हैं. इसके अलावा सीबीआई दो दूसरे चरमपंथियों संदीप डांगे और रामचंद्र कसलंगर को भी ढूँढ रही है क्योंकि वो भी इस मामले में संदिग्ध है.

इस बीच हैदराबाद के पुलिस आयुक्त ने कहा की अगर सीबीआई अनुमति देती है तो पुलिस अधिकारी भी गुप्ता और शर्मा से पूछताछ करेंगे.

अजमेर से तार?

असल में सीबीआई देवेंदर गुप्ता और लोकेश शर्मा को सोमवार को ही अजमेर से हैदराबाद लाने वाली थी लेकिन उनकी सुरक्षा को लेकर पैदा होने वाली आशंकाओं के मद्देनज़र उसमें तीन दिन की देरी हो गई.

सीबीआई ने हैदराबाद की अदालत को बताया है कि मक्का मस्जिद में हुए बम विस्फोट के संबंध में उसे गुप्ता और शर्मा से पूछताछ करनी है.

उसके अलावा सीबीआई ने अदालत से यह भी कहा है कि वो दो दूसरे लापता व्यक्तियों संदीप दंगे और रामचंदर को ढूँढ रही है.

सीबीआई का कहना है कि ये चारों ही मक्का मस्जिद में विस्फोट से दो महीने पहले हैदराबाद आए थे और एक होटल में ठहरे थे.

नाराज़गी

सीबीआई का कहना है कि इन लोगों ने मक्का मस्जिद के आसपास घूम कर उस जगह का जायज़ा लिया था और उसके बाद उन्होंने ही बम भी तैयार किया था जिसमें विस्फोट के लिए मोबाइल फ़ोन का उपयोग किया गया था.

अजमेर के देवेंदर गुप्ता ( जो राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक रह चुके है) और मध्य प्रदेश के लोकेश शर्मा को लगभग डेढ़ महीने पहले ही राजस्थान पुलिस के आतंकवाद विरोधी दल ने गिरफ्तार क्या था.

राजस्थान पुलिस के अनुसार अजमेर की दरगाह में हुए विस्फोट में भी इन दोनों का हाथ था और इसमें जिस मोबाइल फ़ोन के सिम कार्ड का उपयोग किया गया था वो देवेंदर गुप्ता ने ही ख़रीदे थे.

इन गिरफ़्तारियों में हुई देर पर हैदराबाद के मुस्लिम समुदाय ने काफ़ी नाराज़गी जताई है. हैदराबाद में 26 युवाओं ने अदालत में पुलिस के विरुद्ध एक मामला दायर किया है. इन युवाओं का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें प्रताड़ित किया.

इसमें मांग की गई है की उनमें से हर एक को बीस लाख रुपये का मुआवज़ा दिया जाए क्योंकि उन पर आतंकवाद का ग़लत आरोप लगाकर उनके जीवन और उनके भविष्य को बर्बाद कर दिया है.

उनकी यह भी मांग है कि यह राशि सरकारी खज़ाने से न ली जाए क्योंकि वो जनता का पैसा है बल्कि यह राशि उन पुलिस अधिकारियों की जेब से ली जाए जिन्होंने उन्हें इस मामले में फँसाने की कोशिश की और उन्हें यातनाएं दीं.