पुलिस कार्रवाई का विरोध होगा: माओवादी

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Image caption पुलिस का कहना है कि माओवादियों के बारे में जानकारी गिरफ़्तार हुए लोगों से ही मिली

पश्चिम बंगाल में पुलिस कार्रवाई में आठ माओवादियों के मारे जाने के बाद माओवादियों ने कहा है कि वे इसके ख़िलाफ़ दो दिन का विरोध करेंगे.

हाल में पश्चिमी मिदनापुर के पुलिस प्रमुख मनोज वर्मा ने बीबीसी को बताया था कि राज्य पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों ने लालगढ के पास रजना के जंगलों में माओवादियों के अड्डे पर हमला किया था जिसमें आठ माओवादी मारे गए और कई अन्य घायल हुए.

माओवादियों के प्रवक्ता खोकन ने बीबीसी को बताया कि इस सप्ताह के अंत में दो दिन का विरोध रखा जाएगा.

ख़ुद को खोकन बताने वाले माओवादी प्रवक्ता ने फ़ोन पर बीबीसी को बताया, "भारत सरकार शांति की बात करती है और हमारे सामने बातचीत करने की पेशकश करती है. लेकिन हम बातचीत कैसे करत सकते हैं यदि योजनाबद्ध तरीके से लगातार पुलिस कार्रवाई चल रही हो?"

'गिरफ़्तार लोगों से जानकारी मिली'

उधर पुलिस का कहना है कि सुरक्षाबलों को सतर्क रहने को कहा गया है क्योंकि सप्ताह के अंत में और हिंसक हमले हो सकते हैं.

पश्चिम बंगाल के पुलिस प्रमुख भूपेंद्र सिंह ने बीबीसी को बताया, "हमारा अनुमान है कि वे राज्य में कुछ जगहों पर विस्फोट करेंगे और कुछ जगहों पर सुरक्षा बलों पर हमले करेंगे. इसलिए सतर्क रहना ज़रूरी है."

उनका कहना था कि जिन दस ग्रामीण लोगों और कोलकाता के तीन बुद्धिजीवियों को सालबोनी से गिरफ़्तार किया गया है उनसे पूछताछ हो रही है. उनका कहना था कि उन्हें रिहा नहीं किया जाएगा क्योंकि शुरुआती जानकारी के मुताबिक उनके माओवादियों से संबंध हैं.

भूपेंद्र सिंह का कहना था, "इन गिरफ़्तार लोगों में से कुछ की पूछताछ के दौरान ही रांझा जंगलों में माओवादियों की मौजूदगी की बात सामने आई थी. इसके बात मुठभेड़ हुई जो सफल रही. इसलिए कैसे कहा जा सकता है कि वे निर्दोष हैं?"

शहर के जिन तीन बुद्धिजीवियों को गिरफ़्तार किया गया है, वे हैं - सेंट्रल सिरेमिक एंड ग्लास रिसर्च सेंटर की वैज्ञानिक निशा बिसवास, बेहाला कॉलेज के प्रोफ़ेसर कनिष्क चौधरी और लेखक माणिक मंडल.

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