'मृतकों की संख्या दो हज़ार तक'

किर्गिस्तान की अंतरिम नेता रोज़ा ओतुनबायेफ़ ने कहा है कि वहाँ हुई जातीय हिंसा में मरने वालों की संख्या 2000 तक हो सकती है.

अधिकारियों के मुताबिक किर्गिज़ और उज़्बेक मूल के लोगों के बीच औश और जलालाबाद में हुई हिंसा में कम से कम 191 लोग मारे गए हैं.

लेकिन रोज़ा औतुनबायेफ़ ने एक रूसी अख़बार से बातचीत में कहा है कि मरने वालों की असली संख्या आधिकारिक संख्या से 10 गुना ज़्यादा हो सकती है. उन्होंने कहा कि असल संख्या शायद कभी सामने न आए क्योंकि पारंपरिक तौर पर परिवारवाले मृतकों को बहुत जल्द ही दफ़ना देते हैं.

रोज़ा औतुनबायेफ़ ने हिंसा के बाद पहली बार औश का दौरा किया. उन्होंने इन आरोपों का भी खंडन किया कि उनकी अंतरिम सरकार ने स्थिति को ठीक से नहीं संभाला.

इस बीच क्षेत्र में अमरीकी दूत रॉबर्ट ब्लेक ने हिंसा की जाँच कराने की माँग की है.ब्लेक ने शुक्रवार को अंदिजान में शर्णार्थी शिविरों का दौरा किया. करीब चार लाख लोग अपना घर छोड़कर भाग गए हैं और उज़्बेक मूल के कई लोग उज़्बेकीस्तान जा रहे हैं.

किर्गिज़ सरकार ने रूस से अपील की है कि वो शांतिबल भेजे. लेकिन रूस ने इससे इनकार कर दिया है और कहा है कि हिंसा कर रहे लोगों को पकड़ने के लिए तकनीकी मदद दे सकता है.

पिछले हफ़्ते किर्गिस्तान में बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी.दो महीने पहले देश के पूर्व राष्ट्रपति बाकियेफ़ को उनके पद से हटा दिया गया था.रोज़ा ओतुनबायेफ़ की अंतिरम सरकार ने कहा है कि इस हिंसा को भड़काने में पूर्व राष्ट्रपति का हाथ है.

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