गुजरात सरकार से मिली राहत राशि वापस

फ़ाइल फ़ोटो
Image caption नीतीश कुमार ने नरेंद्र मोदी से दूरी ही रखी है

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कोसी बाढ़ पीड़ितों के लिए गुजरात सरकार की ओर से दिए गए पांच करोड़ रुपए गुजरात को लौटा दिए हैं.

पिछले हफ़्ते अख़बारों में विज्ञापन छपा था जिसमें दिखाया गया था कि गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार हाथ पकड़े खड़े हैं और इसमें लिखा गया था कि कैसे बाढ़ जैसी आपदा के दौरान गुजरात सरकार ने बिहार की मदद की.

इसके बाद से ही नीतीश कुमार बेहद नाराज़ चल रहे थे.ये पूरा विवाद 12 जून को शुरु हुआ जब पटना में भाजपा कार्यकारिणी की बैठक हो रही थी. उसी दौरान अख़बारों में नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार की तस्वीर छपी थी.

नीतीश कुमार विज्ञापन से काफ़ी नाखुश थे और अपनी नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए उन्होंने कहा था कि आपदा के समय दी गई मदद को इस तरह जताना भारतीय संस्कृति और नैतिकता के ख़िलाफ़ हैं.

उन्होंने तब ये भी कहा था कि ये विज्ञापन बिना उनकी अनुमति के छापा गया है और विज्ञापन छापने वालों के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई के बारे में सोचा जाएगा.

चुनावी गहमागहमी

बीबीसी संवाददाता मणिकांत ठाकुर ने कहा है कि सूत्रों के मुताबिक पिछले हफ़्ते जब पटना में नरेंद्र मोदी अपना भाषण दे रहे थे तभी नीतीश कुमार ने पाँच करोड़ रुपए का चेक काट दिया था.

लेकिन बिहार सरकार के इस क़दम के साथ ही एक नया विवाद पैदा हो गया है. बिहार सरकार ने विज्ञापन वाले विवाद के बाद दरअसल कहा था कि वे देखेंगे कि अगर कोसी बाढ़ पीड़ितों के लिए गुजरात की ओर से दिया गया पैसा इस्तेमाल न हुआ हो तो उसे लौटा दिया जाएगा.

अब पैसा लौटाने के बाद सवाल उठाए जा रहे हैं कि बाढ़ पीड़ितों के लिए मुख्यमंत्री आपदा राहत कोष में दिया गया पैसा आख़िर इस्तेमाल क्यों नहीं किया गया.

वर्ष 2008 में कोसी में आई ज़बरदस्त बाढ़ में लाखों लोग प्रभावित हुए थे. कोसी नदी के उफ़ान से नेपाल की सीमा से सटे बिहार के पाँच ज़िलों में बहुत नुकसान हुआ था. इस बाढ़ ने हज़ारो जानें ली थीं और लाखों लोगों को बेघर कर दिया था.

इस नए विवाद के साथ ही भाजपा के साथ जनता दल यूनाइटेड के रिश्ते के भविष्य पर भी सवाल उठ रहे हैं. बिहार में भाजपा और जनता दल यूनाइटेड की सरकार है.

दरअसल इस साल बिहार में विधानसभा चुनाव होने हैं. इस पूरे घटनाक्रम को चुनावों से जोड़ कर भी देखा जा रहा है.