न्यायिक आदेश के बावजूद लखनऊ में निर्माण कार्य

डूब क्षेत्र गोमती नदी
Image caption याचिकाकर्ता मुख्य सचिव और अन्य अधिकारियों को क़ानूनी नोटिस भेज रहे हैं

हाईकोर्ट की रोक के बावजूद उत्तर प्रदेश कि मायावती सरकार लखनऊ में गोमती नदी के डूब क्षेत्र में जोर शोर से निर्माण कार्य में जुटी हुई है. इससे लखनऊ शहर के एक बड़े इलाक़े के बरसात में डूबने का खतरा पैदा हो सकता है.

यह निर्माण गोमती बैराज के पास उस स्थान पर हो रहा है जहाँ पर हैदर कैनाल गोमती नदी में मिलता है. यहीं समीप में बहुचर्चित अम्बेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल है जहां मायावती की भी प्रतिमा लगाई गई है.

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी नदी के पेट यानि डूब क्षेत्र में कोई स्थायी निर्माण नहीं होना चाहिए क्योंकि इससे बरसात में नदी का बहाव रुकता है. इसी के साथ आसपास का बरसाती पानी नदी में न जाकर रिहायशी आबादी को डुबोने का काम करता है.

यह निर्माण कई महीनों से चल रहा है. गोमती के तट को पाटकर सड़क के बराबर करने के लिए आसपास के गाँवों से कई हज़ार ट्रक मिट्टी ढोकर लाई गई है जिसकी धूल सडकों पर उड़ती रहती है. पहले तो लोग अनुमान भी नहीं लगा पा रहे थे कि आख़िर क्या बन रहा है क्योंकि सरकारी अधिकारी निर्माण के बारे में मुंह खोलने को तैयार नहीं हैं.

'बहाव क्षेत्र के 100 मीटर में निर्माण नहीं'

शुक्रवार को सच्चिदानंद गुप्त कि ओर से दायर एक जनहित याचिका पर हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने आदेश दिया कि उत्तर प्रदेश सरकार नदी के बहाव क्षेत्र से सौ मीटर के अंदर कोई स्थायी निर्माण नहीं करेगी.

आदेश में कहा गया है कि यह निर्माण क़ानून, लखनऊ के मास्टर प्लान और केंद्र सरकार की आपदा प्रबंधन नीति के खिलाफ़ है.

यह भी कहा गया कि इस निर्माण से पर्यावरण को ख़तरा हो सकता है. सरकार की तरफ़ से सफ़ाई दी गई कि नदी के डूब क्षेत्र में स्थायी निर्माण नहीं हो रहा है, केवल हैदर कैनाल का पानी नदी के उस पार ले जाने के लिए पुलिया और वियर बनाया जा रहा है.

इस पर कोर्ट ने केवल पुलिया और वियर बनाने की अनुमति दी. अदालत ने मौक़ा मुआयना कर रिपोर्ट देने के लिए पर्यावरण जानकारों की एक समिति भी बना दी है.

लेकिन इस आदेश के बावजूद शनिवार को मौक़े पर पहले की तरह निर्माण कार्य जारी था. याचिकाकर्ता सच्चिदानंद गुप्त का आरोप है कि उनके हिसाब से हाईकोर्ट के आदेश का उल्लंघन हो रहा है और निर्माण जारी रखने के बारे में वे मुख्य सचिव एवं अन्य सम्बंधित अधिकारियों को क़ानूनी नोटिस दे रहे हैं.

लखनऊ विकास प्राधिकरण के एक प्रवक्ता ने सफ़ाई दी है कि हाईकोर्ट ने पार्क के निर्माण पर कोई रोक नही लगाई है.

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