एंडरसन के प्रत्यर्पण की कोशिश होगी

भोपाल गैस पीड़ित
Image caption भोपाल गैस पीड़ितों ने कोर्ट के फ़ैसले का कड़ा विरोध किया था.

भोपाल गैस त्रासदी पर गठित मंत्रियों के समूह ने इस दुर्घटना के लिए ज़िम्मेदार यूनियन कार्बाइड के पूर्व प्रमुख वॉरेन एंडरसन के प्रत्यर्पण की नए सिरे से कोशिश करने और घटनास्थल की सफ़ाई कराने की सिफ़ारिश की है.

मंत्रिसमूह आज ही प्रधानमंत्री को अपनी रिपोर्ट पेश करने वाला है. केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि मंत्रिसमूह ने लोगों को राहत पहुंचाने पर ध्यान केंद्रित किया है लेकिन इससे जुड़े कई और पहलुओं पर आगे भी चर्चा होती रहेगी.

चिदंबरम ने बताया कि मंत्रिसमूह ने इस घटना में मारे गए और प्रभावित लोगों का मुआवज़ा बढ़ाने की सिफ़ारिश की है. मृतकों के परिवारजनों के लिए मुआवज़ा बढ़ाकर दस लाख रुपए देने की सिफारिश की है.

इसके अलावा जो स्थायी रुप से विकलांग हुए हैं या जिन पर कोई अन्य प्रभाव पडा है, उनको पाँच लाख और तीन लाख रुपए देने की बात कही गई है.

ख़बरों के अनुसार प्रभावितों को पहले जितना मुआवज़ा दिया गया है वो पैसा इसमें से काट लिया जाएगा.

इतना ही नहीं मंत्रिमंडल ने सिफ़ारिश की है कि सरकार डाउ केमिकल्स की ज़िम्मेदारी तय करने के लिए भोपाल हाई कोर्ट की जबलपुर पीठ में मामला दायर करे. भोपाल में गैस लीक की घटना के बाद यूनियन कार्बाइड को डाउ केमिकल्स ने पूरी दुनिया में ( भारत को छोड़कर) ख़रीद लिया था.

पिछले दिनों भोपाल की एक अदालत ने इस मामले में 25 साल के बाद सज़ा सुनाते हुए सात दोषियों को दो दो साल की सज़ा सुनाई थी. जिसके बाद राष्ट्रीय स्तर पर इसकी कड़ी आलोचना हुई थी.

इन आलोचनाओं के मद्देनज़र प्रधानमंत्री ने मंत्रिसमूह का गठन किया था और दस दिनों में रिपोर्ट सौंपने को कहा था.

माना जाता है कि जीओएम या मंत्रिसमूह ने सिफारिश की है कि राज्य की सरकार घटनास्थल की सफाई करवाए जिसमें केंद्र सरकार वित्तीय और तकनीकी मदद करेगा.

अगले कुछ दिनों में केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका( क्यूरेटिव पेटिशन) दायर कर इस मामले में अभियुक्तों के ख़िलाफ़ आरोपों को कमज़ोर करने संबंधी 1996 के सुप्रीम कोर्ट के एक फ़ैसले को चुनौती दे सकती है.

1996 में सुप्रीम कोर्ट ने अभियुक्तों के ख़िलाफ़ गैर इरादतन हत्या के मामले को बदलकर आपराधिक अनदेखी का मामला कर दिया था.

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