अमरीका से सहयोग के लिए समिति

प्रणव मुखर्जी और हिलेरी क्लिंटन
Image caption प्रणव मुखर्जी अमरीका की यात्रा पर हैं

अमरीका के साथ आर्थिक संबंधों को बढ़ाने के लिए नए क्षेत्रों की तलाश करने के उद्देश्य से भारत एक उच्च स्तरीय समिति का गठन कर रहा है.

भारत का अनुमान है कि भारत में आधारभूत ढाँचे के क्षेत्र में लगभग 300 अरब डॉलर के निवेश की संभावना है.

इस समिति की अध्यक्षता योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहवलूवालिया करेंगे, यह समिति भारत के विभिन्न मंत्रालयों से विचार-विमर्श के बाद एक कार्ययोजना तैयार करेगी.

भारत के वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने वाशिंगटन में समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया है कि यह कार्ययोजना नवंबर महीने में अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की भारत यात्रा के दौरान उनके सामने रखी जाएगी.

प्रणव मुखर्जी ने कहा कि भारत को आधारभूत सुविधाओं के क्षेत्र में एक खरब डॉलर के पूंजी निवेश की आवश्यकता है, जिसमें से 25 से 30 प्रतिशत तक की कमी दिखाई दे रही है जिसे अमरीकी कंपनियाँ पूरा कर सकती हैं.

इंडो-यूएस सीईओ फ़ोरम की बैठक में हिस्सा लेने के बाद वाशिंगटन में भारतीय वित्त मंत्री ने कहा कि "विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन और वित्त मंत्री टिमथी गाइटनर की बातों से मुझे यही लगा कि वे भारत भारत-अमरीका संबंधों में व्यापकता लाना चाहते हैं और उसे प्रगाढ़ बनाना चाहते हैं, कुल मिलाकर यह बहुत अच्छी यात्रा रही और सभी बैठकें बहुत सफल रहीं."

भारतीय वित्त मंत्री ने कहा, "हमने कई ऐसे क्षेत्रों की पहचान की है जिनमें मिल जुलकर काम करने की संभावना है, भारतीय और अमरीका, दोनों देशों के सीईओ भी चाहते हैं कि हम शिक्षा, आधारभूत सुविधाओं, स्वच्छ ऊर्जा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में परस्पर सहयोग बढाएँ."

उन्होंने कहा कि भारत और अमरीका के आपसी संबंध सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. उन्होंने कहा, "मुझे पूरा विश्वास है कि प्रमुख क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग और बढ़ेगा, आर्थिक मंदी के बावजूद दोनों देशों के बीच 37 अरब डॉलर का सालाना व्यापार हो रहा है."

एक सवाल के जवाब में वित्त मंत्री ने कहा कि यह कहना ग़लत होगा कि आधारभूत सुविधाओं के क्षेत्र में आशा के अनुरूप निवेश अमरीकी निवेश नहीं हो रहा है, उन्होंने माना कि आधारभूत सुविधा के क्षेत्र में निवेश को बढ़ाने की बहुत गुंजाइश है.

प्रणव मुखर्जी ने कहा कि भारत में बीमा के क्षेत्र में विदेशी पूंजी निवेश की सीमा को 26 प्रतिशत से बढ़ाकर 49 प्रतिशत करने पर भी बात हुई और इस मामले में क़ानून में संशोधन की आवश्यकता है जिसकी प्रक्रिया चल रही है.

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