भोपाल त्रासदी: महिन्द्रा को सशर्त ज़मानत

केशव महिन्द्रा
Image caption केशव महिन्द्रा को देश छोड़कर न जाने को कहा है

भोपाल गैस त्रासदी मामले में दोषी करार दिए गए यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड के पूर्व अध्यक्ष केशव महिन्द्रा को अदालत ने सशर्त ज़मानत दे दी है.

अदालत में हर सुनवाई में ज़मानत के लिए अदालत में मौजूद रहने और देश छोड़कर न जाने सहित चार शर्तें लगाई हैं.

अदालत ने गत सात जून को इस मामले में आठ दोषियों को दो-दो साल की सज़ा सुनाई थी और एक-एक लाख का जु्र्माना भी लगाया गया था. इन आठ लोगों में से एक की मौत हो चुकी है.

सज़ा सुनाए जाने के बाद ही अदालत ने सात अभियुक्तों को ज़मानत दे दी थी.

दो-दो साल की सज़ा के बाद से भोपाल गैस त्रासदी को लेकर हंगामा खड़ा हो गया है और सवाल पूछे जा रहे हैं कि यूनियन कार्बाइड के पूर्व अध्यक्ष वारेन एंडरसन को क्यों ज़मानत देकर अमरीका जाने दिया गया.

गैस पीड़ितों को राहत और पुनर्वास को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं.

केंद्र सरकार ने इसके बाद गैस पीड़ितों को मुआवज़ा बढ़ाने और ज़हरीले कचरे की सफ़ाई जैसे कई निर्णय लिए हैं और कहा है कि सरकार एंडरसन के प्रत्यार्पण की कोशिश करेगी.

जमानत

भोपाल की अदालत में केशव महिन्द्रा को एक लाख रुपए के मुचलके पर ज़मानत देते हुए कहा है कि सात जून को दी गई ज़मानत को ही जारी रखा जा रहा है.

अदालत ने उनसे कहा है कि ज़मानत इस शर्त पर दी जा रही है कि जब भी इस मामले की सुनवाई होगी, वे अदालत में मौजूद रहेंगे.

ज़मानत के लिए शर्त लगाई गई है कि इस मामले में अदालत कोई भी फ़ैसला करेगी तो महिद्रा को यह मान्य होगा.

अदालत के आदेश तुरंत लागू होने की बात कहते हुए कहा गया है कि अदालत को सूचना दिए बिना केशव महिद्रा देश से बाहर नहीं जाएँगे.

शेष छह लोगों की ज़मानत याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई होनी है.

सज़ा

Image caption बच गए हज़ारों लोग कई तरह ही बीमारियाँ झेल रहे हैं

अदालत ने सात जून को आठ लोगों को दोषी क़रार दिया था. इसमें यूनियन कार्बाइड से जुड़े केशव महिंद्रा, वीपी गोखले, किशोर कामदार, एसपी चौधरी, आरबी रॉय चौधरी, केवी शेट्टी, जे मुकुंद और एसआई कुरैशी शामिल हैं.

साथ ही कंपनी को पाँच लाख रुपए के जुर्माने से दंडित किया गया था.

केशव महिंद्रा यूनियन कार्बाइड की भारत इकाई के प्रमुख थे जबकि वीपी गोखले प्रबंध निदेशक थे.

इनमें से आरबी रॉय चौधरी की मौत हो चुकी है.

इन लोगों को धारा 304 (ए) और धारा 304 के तहत दोषी क़रार दिया गया था जो लापरवाही के कारण मौत से संबंधित हैं.

इस मामले में यूनियन कार्बाइड के प्रमुख वॉरेन एंडरसन फ़रार घोषित किए गए थे, फ़ैसले में उनके बारे में कुछ नहीं कहा गया था.

इस मामले में सुनवाई लगभग 25 वर्ष चली और इसी साल 13 मई को पूरी हुई.

इस सज़ा को लेकर देश की कई संस्थाओं ने कड़ी निंदा की थी और कहा था कि हज़ारों लोंगों को जान से मारने के बदले दो-दो साल की सज़ा मज़ाक है.

लेकिन क़ानूनविदों का कहना है कि इन सभी लोगों पर जो धाराएँ लगाई गई थीं उसमें सभी को अधिकतम सज़ा सुनाई गई है.

25 साल पहले 2/3 दिसंबर, 1984 को भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड कारखाने से रिसी जहरीली मिथाइल आइसोसायनेट गैस के कारण हज़ारों लोग मारे गए थे और अनेक लोग स्थायी रूप से विकलांग हो गए थे.

भोपाल गैस त्रासदी पूरी दुनिया के औद्योगिक इतिहास की सबसे बड़ी दुर्घटना मानी जाती है.

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