मंहगाई के मुद्दे पर भारत बंद

पेट्रोल
Image caption पेट्रोल की बढ़ती कीमतों के मुद्दे पर सभी विपक्षी दल एक मंच पर आ गए हैं

मंहगाई के मुद्दे पर विपक्ष ने सोमवार को सारे भारत में बंद का आयोजन किया है. देश के प्रमुख विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी और वामपंथी दलों ने सरकार की नीतियों के विरोध में सड़को पर उतरने का आह्वान किया है.

बीजेपी और वामपंथियों ने अलग-अलग भारत बंद का ऐलान किया है.

संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले विपक्ष के इस शक्ति प्रदर्शन को नाकाम करने के लिए कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं. बंद से आवश्यक सेवाओं को दूर रखा गया है.

भारतीय जनता पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार ने जनता के साथ धोखा किया है जबकि वामपंथी नेता नीलोत्पल बसु ने कहा कि सरकार की नीतियों का विरोध सड़कों पर उतर कर किया जाएगा.

भारत बंद की रणनीति को आख़िरी रुप देने के लिए रविवार को भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी के घर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के नेताओं ने मुलाकात की.

मुलाकात के बाद लाल कृष्ण आडवाणी ने कहा कि कांग्रेस सरकार आम आदमी के प्रति असंवेदनशील हो गई है.

Image caption आडवाणी ने कहा कि उनकी याददाश्त में पहली बार पूरे विपक्ष ने एक ही दिन भारत बंद का आह्वान किया

आडवाणी ने कहा "कांग्रेस सरकार 2004 से लगातार आम आदमी का नारा देती रही है, पर सबसे ज़्यादा आम आदमी के साथ विश्वासघात खाद्य पदार्थों की कीमतों के स्तर पर हुआ है."

आडवाणी के घर हुई मुलाकात में मुरली मनोहर जोशी, शरद यादव, गोपीनाथ मुंडे, एस एस अहलूवालिया, सुशील कुमार मोदी, हरसिमरत कौर बादल, सुषमा स्वराज और अरुण जेटली शामिल हुए.

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के संयोजक शरद यादव ने कहा, "भारत की जनता सोमवार को सड़कों पर होगी, हम सब भी जनता के साथ सड़कों पर होंगे."

आडवाणी ने कहा कि उनकी याददाश्त में ये पहली बार हुआ कि लगभग पूरे विपक्ष ने एक ही दिन भारत बंद का आह्वान किया हो.

उन्होने बंद में शामिल न होने वाली पार्टियों पर भी चुटकी ली.

उन्होंने कहा, "लगभग शब्द का इस्तेमाल मैं इसलिए कर रहा हूं क्योंकि कुछ पार्टियाँ सरकारी दबाव में रहती हैं कई कारणों से... दो- तीन पार्टियाँ हैं जो इस बंद में शामिल नहीं हैं."

"भारत बंद" कोई समाधान नहीं

वहीं पाँच जुलाई को पेट्रोल पदार्थों की बढ़ी क़ीमतों के खिलाफ विपक्ष के भारत बंद से पहले पेट्रोलियम और गैस मंत्रालय ने रविवार को अखबार में विज्ञापन देकर जनता के सामने अपना पक्ष रखने की कोशिश की है.

विज्ञापन में कहा गया है कि "भारत बंद" कोई समाधान नहीं है.

आडवाणी ने पेट्रोलियम और गैस मंत्रालय के विज्ञापन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "मुझे तो आश्चर्य हुआ कि हिन्दुस्तान में पहली बार विपक्ष के एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम का प्रचार सरकार ने किया है."

उनका कहना था," हम ये दावा नहीं करते कि 'भारत बंद' महंगाई का समाधान है, महंगाई का समाधान सरकार के पास है.पर जनता हमसे ये उम्मीद जरुर करती है कि हम सरकार के इस रवैये का विरोध करें."

विज्ञापन में एलपीजी गैस और केरोसीन की क़ीमतों को पड़ोसी देशों से तुलना की गई है.

आडवाणी ने सरकार पर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि विज्ञापन में पेट्रोल के दाम की तुलना नहीं की गई है जबकी पाकिस्तान में पेट्रोल के दाम 26 रुपये रुपये प्रतिलीटर, बांग्लादेश में 22 रुपये प्रतिलीटर, नेपाल में 34 रुपये प्रतिलीटर, बर्मा में 30 रुपये प्रतिलीटर है.

वाम नेता नीलोत्पल बासु ने फोन पर एक बातचीत में कहा कि सरकार तेल कंपनियों के इशारों पर काम कर रही है और पेट्रोल की क़ीमतें बढ़ा रही है.

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