'राहत कार्यों में वायुसेना की मदद'

छत्तीसगढ़ के दौरे पर आए गृह सचिव जीके पिल्लई ने कहा है कि नक्सल विरोधी अभियान में वायु सेना की मदद ली जाएगी. पर साथ ही उन्होंने स्पष्टिकरण देते हुए कहा कि ये मदद सिर्फ़ जवानों को लाने-ले जाने, राहत कार्यों और लॉजिस्टिक के लिए ली जाएगी.

रायपुर में गृह सचिव ने साफ़ किया कि हमला करने के लिए वायु सेना का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा. पिल्लई ने राज्य के पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ लंबी समीक्षा बैठक की.

बैठक के बाद उन्होंने स्वीकार किया कि राज्य पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के बीच मतभेद था और साथ ही कहा कि बातचीत से इन सारी बातों को सलटा लिया गया है.

उन्होंने बताया कि आगामी १४ जुलाई को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नक्सल प्रभावित सात राज्यों के मुख्यमंत्रियों, पुलिस महानिदेशकों और मुख्य सचिवों की एक महत्वपूर्ण बैठक दिल्ली में बुलाई है.

बैठक के बाद इन सभी राज्यों से आए मुख्यमंत्री और अधिकारी प्रधानमंत्री से भी मिलेंगे.

गृह सचिव ने कहा, “फ़िलहाल नक्सल विरोधी अभियान उतना सशक्त नहीं है जितना उसे होना चाहिए क्योंकि राज्यों के पास पुलिस बल की काफ़ी कमी है.मौजूदा परिस्थितियों में नक्सल समस्या झेल रहे राज्यों के पास आठ लाख पुलिसवालों की कमी है. यही वजह है कि नक्साली समस्या पर काबू पाने में सात वर्षों का समय लग सकता है. वैसे गृह मंत्रालय ने भी अर्धसैनिक बलों की तीस नई बटालियन तैयार करने के प्रस्ताव पर अमल करना शुरू कर दिया है. मगर इसमें भी कुछ वर्षों का वक़्त लग सकता है.” पिल्लई ने बताया की नक्सल प्रभावित इलाकों में विकास पर अधिक बल दिया जा रहा है.

इसके लिए योजना आयोग के सचिव के नेतृत्व में एक ‘हाई पावर’ समिति का गठन किया गया है ताकि इन इलाकों में चल रही विकास योजनाओं की शर्तों को और सरल बनाया जा सके.

इस बीच पिछले हफ़्ते छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में हुए नक्सली हमले की जाँच के लिए सीआरपीएफ़ ने तीन सदस्यीय जाँच समिति बिठाई है. ये समिति आला अधिकारियों को रिपोर्ट सौंपेगी जो बाद में इसे गृह मंत्री के पास भेजेंगे. इस बीच

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