श्रीनगर में सेना ने किया फ़्लैग मार्च

श्रीनगर में सुरक्षा (फ़ाइल फ़ोटो)
Image caption सेना के आने से हिंसक प्रदर्शनों पर रोक की उम्मीद की जा रही है

भारत प्रशासित कश्मीर में विरोध प्रदर्शन के एक बार फिर हिंसक हो जाने के बाद मंगलवार की रात श्रीनगर और तीन और शहरों मेंमें अनिश्चित काल का कर्फ़्यू लगा दिया गया है और श्रीनगर में क़ानून व्यवस्था संभालने के लिए सेना को बुलाया गया है.

सेना के प्रवक्ता जेएस बरार ने बीबीसी को बताया है कि अब सैनिकों को तैनात करने की तैयारी की जा रही है.

इससे पहले राज्य में पुलिस के प्रमुख कुलदीप खुडा ने भी कहा था कि 'राज्य सरकार ने कुछ संवेदनशील इलाक़ों में सेना से कमान संभालने को का अनुरोध किया है और सूरज की पहली किरण के साथ ही वे वहाँ तैनात हो जाएँगे.'

बीबीसी संवाददाता के अनुसार दोपहर से पहले सेना की एक टुकड़ी ने एयरपोर्ट रोड पर फ़्लैग मार्च किया है लेकिन व्यावहारिक रुप से सेना की तैनाती दोपहर तक शुरु नहीं हुई थी.

कुछ दिनों की शांति के बाद श्रीनगर में एक बार फिर हिंसक प्रदर्शनों का दौर शुरु हुआ जिसमें कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई और पचास के अधिक घायल हुए हैं.

पिछले महीने सोपोर में दो युवकों के कथित रुप से अर्धसैनिक बलों की गोली से मौत हो जाने के बाद प्रदर्शनों का नया दौर शुरु हुआ. प्रदर्शनकारी और सुरक्षाबलों के बीच लगातार झड़पें हो रही हैं और सुरक्षाबलों की गोलियों से जून से अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है.

राज्य के अनुरोध पर

सेना के अधिकारियों का कहना है कि राज्य सरकार के अनुरोध पर श्रीनगर पर सेना की तैनाती की जा रही है.

राज्य के पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अमरनाथ यात्रियों की सुरक्षा के लिए बड़ी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बलों को तैनात किया गया है इसलिए श्रीनगर और आसपास के इलाक़ों में तैनात करने के लिए सुरक्षा बलों की पर्याप्त संख्या उपलब्ध नहीं है इसीलिए सेना को बुलवाया गया है.

श्रीनगर में बीबीसी के संवाददाता अल्ताफ़ हुसैन का कहना है कि मंगलवार को प्रदर्शनकारियों के साथ हुए व्यवहार से एक बार फिर लगा कि पुलिस को प्रदर्शनकारियों से निपटने का तरीक़ा समझ में नहीं आ रहा है और ऐसा दिखता है कि सरकार के हाथों में बात निकल रही है.

उनका कहना है कि अगर सेना की तैनाती हो जाती है तो घाटी में हिंसक प्रदर्शनों पर लगाम लगेगी.

श्रीनगर के अलावा तीन और शहरों में कर्फ़्यू लगाया गया है. ये तीन शहर अनंतनाग, काकपुरा और पुलवामा है. अनंतनाग में पिछले आठ दिनों से कर्फ्यू लगा हुआ है.

इस बीच बारामूला में लोग बाहर निकले हैं और एक पुल पर धरना दे रहे हैं. ख़बरें हैं कि सुरक्षा बलों ने उन्हें अब तक उन्हें रोका नहीं है.

हिंसा और मौतें

Image caption सुरक्षा बलों पर पथराव के बाद हो रही फ़ायरिंग से मौतें हुई हैं

श्रीनगर के विभिन्न इलाक़ों में मंगलवार को कम से कम तीन लोगों की मौतें हुईं.

बटमालू में प्रदर्शन के दौरान पथराव कर रही भीड़ पर जब सुरक्षा बलों ने गोलीबारी की तो फ़याज़ अहमद नामके एक युवक की मौत हो गई.

इसी इलाक़े में हिंसा पर उतारू एक भीड़ को तितर-बितर करने के लिए जब पुलिस ने फ़ायरिंग की तो एक गोली 25 वर्षीय युवती फ़ैंसी को लगी और उसकी मौत हो गई.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार 18 वर्षीय अक़बर ख़ान की मौत श्रीनगर के माइसूमा इलाक़े में हुई.

श्रीनगर के अलावा हिंसा की घटनाएँ बारामूला, पुलवामा, काकपुरा और अनंतनाग में हुई.

कुछ दिनों की शांति के बाद हिंसक प्रदर्शनों का नया दौर मुज़फ़्फ़र अहमद की मौत के विरोध में शुरु हुआ.

इस युवक की सोमवार की शाम मौत डूबने से हो गई थी. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि युवक पुलिस की वजह से डूबा. इस मामले में पुलिस ने कोई बयान नहीं दिया है.

प्रेक्षकों का कहना है कि पुलिस और अर्धसैनिक बलों को समझ में नहीं आ रहा है कि इन प्रदर्शनकारियों से निपटा जाए.

उनका कहना है कि सुरक्षाबल पहले चरमपंथियों से गोलियों के सहारे निपटने का अभ्यास रहा है लेकिन आम लोगों से निपटने में उन्हें दिक्कत हो रही है.

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