बहुराष्ट्रीय कंपनियों पर बात करना चाहेंगे: तेलुगु दीपक

वेंकटेश्वर राव
Image caption वेंकटेश्वर राव की छह राज्यों की पुलिस को तलाश थी

पश्चिम बंगाल पुलिस ने इस साल मार्च में कोलकाता बस स्टेशन से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के केंद्रीय सैन्य विभाग के सदस्य वेंकटेश्वर रेड्डी ऊर्फ़ तेलुगू दीपक को गिरफ़्तार किया था.

दस उपनामों से मशहूर वेंकटेश्वर रेड्डी पश्चिम बंगाल में माओवादी आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से एक हैं और उनपर हत्या, दंगा करने और राज्य के खिलाफ़ युद्ध शुरु करने और राजद्रोह जैसे कई आरोप हैं.

पुलिस ने उनपर दस लाख रुपए से अधिक का पुरस्कार रखा हुआ था और गिरफ़्तारी से पहले छह राज्यों की पुलिस को उनकी तलाश थी.

आरोपों से इनकार

कोलकाता की एक अदालत की परिसर में बीबीसी से बातचीत में वेंकटेश्वर राव ने पुलिस के इन आरोपों से इनकार किया और कहा कि उन्होंने तो हथियार चलाने का प्रशिक्षण भी नहीं लिया है.

बातचीत में 43 साल के वेंकटेश्वर रेड्डी एक क्रांतिकारी की जगह कम बोलने वाले शिक्षक नज़र आते हैं जो शब्दों का चयन बहुत सावधानी से करते हैं.

रेड्डी ग्रामीण इलाक़ों में ग़रीबी और उपेक्षा से क्रांतिकारी बने माओवादियों की तुलना में एक शहरी क्रांतिकारी हैं.

उनका जन्म आंध्र प्रदेश के प्रकाशम ज़िले के एक गाँव में एक किसान के घर हुआ था. उनकी प्राथमिक शिक्षा-दिक्षा भी गाँव में ही हुई.

गुंटूर के पालिटेक्निक से उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. यह इलाक़ा क्रांतिकारी गतिविधियों से अधिक अपने मिर्चे और तंबाकू की खेती के लिए जाना जाता है.

गुंटूर में इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान ही रेड्डी अतिवामपंथ की ओर आकर्षित हो गए थे. साल 1990 में भूमिगत होने के बाद 1995 में वे पश्चिम बंगाल आ गए थे.

जायज है हिंसा

उनसे पूछा गया कि सत्ता पर कब्ज़ा करने के लिए वे हिंसा को जायज़ कैसे ठहरा सकते हैं?

इस सवाल के जवाब में वेंकटेश्वर राव कहते हैं, ''क्रांतिकारी हिंसा वास्तव में एक जवाबी हिंसा है. यह अपने आप में कोई हिंसा नहीं है. सरकार का रवैया दमनकारी है इसलिए क्रांतिकारी उसका जवाब हिंसा से दे रहे हैं.''

Image caption 'सरकार बातचीत के एजंडे पर चुप क्यों है'

गृहमंत्री पी चिदंबरम के वार्ता के प्रस्ताव के सवाल पर रेड्डी गुस्से में कहते हैं,'' सरकार दमन रोकने का वादा नहीं कर रही है. वह हमारा सैन्य तरीकों से मुकाबला करने की तैयारी भी कर रही है और वार्ता की बात भी कर रही है.''

वह कहते हैं,''सरकार हमसे हथियार छोड़ने की बात करती है लेकिन अनुकूल वातावरण के बिना बातचीत कैसे संभंव है.''

वह पूछते हैं,''बातचीत का एजंडा क्या होगा? सरकार इस विषय पर चुप क्यों है? ''

जब उनसे पूछा गया कि अगर बातचीत होती है तो वे किस विषय पर बात करेंगे?

इस सवाल के जवाब में रेड्डी ने कहा, ''हम बड़ी कंपनियों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के बारे में बातचीत करना चाहेंगे जिन्होंने सरकार के साथ खनन के लिए समझौते किए हैं, वह भी उन इलाक़ों में जहाँ हमारी मौज़ूदगी है. माओवादी इस तरह के शोषण का विरोध कर रहे हैं लेकिन सरकार सुन नहीं रही है.''

रेड्डी कहते हैं कि माओवादी आंदोलन देश के एक बहुत बड़े हिस्से तक फैल चुका है जो कि खनिज बहुल जंगल और ग्रामीण इलाक़ा है. जहाँ भारत के अधिकांश आदिवासी रहते हैं. यह ग़रीबों की जीने के लिए लड़ाई है.

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