सड़क के लिए भूख हड़ताल

सड़क
Image caption असम के विधायक अताउर रहमान राजमार्ग की स्थिति सुधारने की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे हैं

अपनी बात मनवाने के लिए भारतीय राजनेताओं की भूख हड़ताल आम बात है, लेकिन यह शायद पहली बार हुआ है कि कोई नेता सड़क के लिए अनशन पर बैठा हो.

राष्ट्रीय राजमार्ग 44 की बदतर स्थिति से दुखी होकर असम के विधायक मौलाना अताउर रहमान मज़रभुइया बुधवार से भूख हड़ताल कर रहे हैं. उनकी मांग है कि चार राज्यों को जोड़ने वाली इस 30 किलोमीटर लंबी सड़क को 'तुरंत सुधारा' जाए.

अताउर रहमान ने बीबीसी से फ़ोन पर बात करते हुए कहा, "इस सड़क की हालत गाँव की सड़क से भी ख़राब है. सड़कों पर बने गडढों की वजह से ड्राइविंग बेहद मुश्किल है. इस मानसून में तो राजमार्ग के कुछ हिस्से कीचड़ के ढेर बन गए हैं."

वे बताते हैं, "इस राजमार्ग को सुधारने की हमारी सारी कोशिशों, आवेदनों का कोई नतीजा नहीं निकला. इस वजह से मुझे यह क़दम उठाना पड़ा है. मैं तब तक यह हड़ताल जारी रखूँगा जब तक सरकार इसे सुधारने का काम शुरू नहीं कर देती."

राष्ट्रीय राजमार्ग 44 असम को दक्षिणी बराक घाटी और पड़ोसी राज्य त्रिपुरा, मिज़ोरम और मणिपुर से जोड़ता है.

इस राजमार्ग पर धीमे ट्रैफ़िक की वजह से त्रिपुरा और मणिपुर में ज़रूरी चीजें, जैसे पेट्रोल की किल्लत होती है.

अनदेखी

मौलाना रहमान का कहना है कि असम-मेघालय सीमा के नजदीक मलिधर से काटीगोराह तक इस राजमार्ग की बदतर स्थिति है. वे विधानसभा में काटीगोरा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं.

सीमा सड़क संगठन महत्वपूर्ण राजमार्गों की देखरेख करता है. इस संगठन पर सड़क सुधारने की अपील अनदेखी करने का आरोप है.

स्थानीय ट्रक मालिकों के प्रवक्ता मुजीबुर रहमान बारभुइया का कहना है, "इस 30 किलोमीटर की सड़क को पार करने में ट्रकों को छह से आठ घंटे लगते हैं. इस बात पर विश्वास नहीं होता. "

मौलाना रहमान एयूडीएफ़ दल के सदस्य हैं जिसे मुख्य रूप से मु्सलमानों का समर्थन मिलता है, लेकिन उनके इस भूख हड़ताल का समर्थन आश्चर्यजनक रूप से भारतीय जनता पार्टी भी कर रही है.

वे कहते हैं कि भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने मेरे इस अनशन का समर्थन किया है.

असम सरकार के एक प्रतिनिधि का कहना है कि सीमा सड़क संगठन से इस राजमार्ग को 'तुरंत मरम्मत' करने की अपील की गई है.

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