तीन में से दो महिलाओं के साथ यौन दुर्व्यवहार

यौन प्रताड़ना
Image caption इससे बचने के लिए नागरिक अभियान छेड़ने का सुझाव दिया गया है

दिल्ली में पिछले एक साल के भीतर तीन में से दो महिलाएँ यानी 66 प्रतिशत महिलाएँ कम से कम दो से पांच बार यौन दुर्व्यवहार का शिकार हुईं हैं.

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ये निष्कर्ष है ‘सेफ़ सिटीज़ बेसलाइन सर्वे – दिल्ली 2010’ का. ये सर्वे दिल्ली सरकार के महिला और बाल विकास मंत्रालय, ग़ैर-सरकारी संस्था जागोरी, संयुक्त राष्ट्र के महिलाओं के लिए विकास कोष और यूएन हैबिटाट ने संयुक्त रुप से करवाया है.

सर्वेक्षण की रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली में सभी वर्गों की महिलाएँ यौन प्रताड़ना का शिकार होती हैं लेकिन 15 से 19 वर्ष के बीच स्कूल और कॉलेज जाने वाली लड़कियाँ और असंगठित क्षेत्र में काम करने वाली महिलाएँ इससे ज़्यादा प्रभावित हैं.

यौन दुर्व्यवहार की घटनाएँ सुनसान जगहों के अलावा भीड़-भाड़ इलाक़ों में भी होतीं हैं. सर्वाधिक घटनाएँ जन-यातायात जैसे सरकारी बसों और सड़कों के किनारे होतीं हैं.

ख़ुद की सुरक्षा

ये घटनाएँ अंधेरा होने के बाद ही नहीं बल्कि दिन में होती हैं. रिपोर्ट के मुताबिक पाँच में से तीन महिलाओं ने रात के अलावा दिन में भी यौन प्रताड़ना का सामना किया है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि यौन उत्पीड़न की घटना से निबटने और ख़ुद को सुरक्षित रखने की ज़िम्मेदारी स्वयं महिलाओं को ही लेनी पड़ती है. महिलाएँ इसके डर से सुनसान जगहों पर नहीं जातीं हैं.

साथ ही वे अंधेरा होने के बाद घर पर रहने की कोशिश करतीं हैं. महिलाएँ ‘सेफ़्टी पिन’ और ‘पेपर स्प्रे’ भी अपने पास रखतीं हैं ताकि समय आने पर इनका इस्तेमाल किया जा सके.

सर्वेक्षण में दिल्ली के 23 क्षेत्रों की 50 जगहों पर लोगों से साक्षात्कार किए गए. कुल मिलाकर 5,010 लोगों से बातचीत की गई जिनमें 3,816 महिलाएँ, 944 पुरुष और 250 यौन प्रताड़ना के मिले-जुले प्रत्यक्षदर्शी थे.

सर्वे में समस्या से निबटने के लिए दिल्ली की सड़कों पर रोशनी में सुधार और जन शौचालयों में महिलाएँ की प्राइवेसी के इंतज़ाम करने का सुझाव दिया है.

इसके अलावा महिलाओं की सुरक्षा का नागरिक अभियान चलाने की भी बात की गई है.

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