दुनिया की सबसे लंबी तेल पाइप लाइन

तेल पाइप लाइन
Image caption राजस्थान के तेल से भारत की 20 प्रतिशत ज़रूरत पूरी होने की संभावना है

भारत के थार मरुस्थल ने या तो रेतीले मार्ग देखे हैं या पानी प्रवाहित करती लोह पाइप लाइने. लेकिन रेगिस्तान में तेल निकलने के बाद अब ये इलाक़ा दुनिया की सबसे लंबी तेल प्रवाही पाइप लाइन का गवाह बन गया है.

लगभग 670 किलोमीटर लंबी ये पाइप लाइन राजस्थान के बाड़मेर से तेल लेकर गुजरात के भोगत तक जाती है. बाड़मेर का मंगला तेल क्षेत्र हर रोज़ एक लाख बैरल तेल पैदा कर रहा है.

मंगला केयर्न इंडिया कंपनी के नियंत्रण में है. इस तेल को इंडियन आयल कॉर्पोरेशन ख़रीद रही है. केयर्न इंडिया के मुताबिक अपनी क़िस्म की ऐसी पहली तेल पाइप लाइन बिछाना इन्जीनियरिंग कौशल का कमाल है. बाड़मेर के मंगला में मिला तेल अधिक वाला है, इसलिए इसका परिवहन थोडा कठिन काम था. मगर इंजीनियरों ने राह निकाल ली.

270 गावों से निकलती पाइप लाइन

इस पाइप लाइन में स्किन इफ़ेक्ट ऊष्मा प्रबन्धन तकनीक का इस्तेमाल किया गया है. इसके तहत मोम युक्त तेल को गर्म रखते हुए प्रवाही बनाया जाता है और उसे तेल शोधक इकाई तक भेजा जाता है.

केयर्न को भरोसा है कि इस साल इस पाइप लाइन के ज़रिए एक लाख पचीस हज़ार बेरल तेल हर रोज़ भेजा जा सकेगा.

मरुस्थल में पहले माल परिवहन के कारवां गुज़रते थे. समय बदला तो अब धरती से तेल की धार फूटी और अब एक भरकम पाइप लाइन राजस्थान और पड़ोस के गुजरात के 270 गावों से गुज़रती हुई अपने आखिरी मुकाम तक जाती है. ये अपने इस सफ़र में दोनों राज्यों के आठ जिलो में 34 नदी मार्गों और 38 नहर मार्गों सहित कोई 700 क्रोस्सिंग्स से रूबरू होती है.

इसमें तेल को परिवहन लायक ब नाने के लिए गर्म किया जाता है. इसके लिए प्राकृतिक गैस का इस्तेमाल किया जाता है.

विज्ञानिक कहते हैं कि बाड़मेर में निकला तेल भारी, कम गंधक वाला और मोम युक्त है. इसका परिवहन और इस्तेमाल एक चुनोती था. केयर्न कम्पनी ने अपने इंजीनियरों को दुनिया के और हिस्सों में मिले ऐसे ही तेल के उत्पदान और इस्तेमाल के तरीको का अध्यन करने भेजा.

लाखों बेरल तेल

केयर्न का मानना है कि इससे ना केवल राजस्थान को हायड्रो कार्बन क्षेत्र में आगे बढने में मदद मिलेगी बल्कि भारत के लिए हर साल बीस अरब डालर तेल आयात में आ रहे ख़र्च को भी कम करेगी.

इस समय मंगला से प्रतिदिन एक लाख पांच हजार बेरल तेल पैदा हो रहा है. अगले एक माह में ये मात्रा सवा लाख बेरल तक हो जाएगी. इसमें से इंडियन आयल कोर्पोरेशन हर रोज़ 13000 बेरल तेल खरीदेगी. वैसे इंडियन आयल हर साल केयर्न से 90 लाख टन तेल हासिल कर इसे पानीपत रिफ़ाइनरी में शोधित कराएगी. अभी इस तेल को इस पाइप लाइन के ज़रिए गुजरात भेजा जाता है और फिर मूंदड़ा -पानीपत पाइप लाइन के ज़रिये शोधन के लिए भेजा जाता है.

थार का मंगला क्षेत्र अब तक कोई 60 लाख बेरल तेल उत्पादित कर चूका है. मंगला ने पिछले साल ही अगस्त में तेल का उत्पादन शुरू किया था.

भारत जैसे बड़े देश के लिए तेल एक अहम् जरूरत है. अभी भारत हर रोज 24 लाख बेरल तेल आयात करता है . उसकी घरेलू उत्पादन क्षमता महज़ 70 हज़ार बेरल प्रतिदिन है.

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