प्रधानमंत्री का सुरक्षा बंदोबस्त निशाने पर

सुरक्षा इंतज़ाम देखते पुलिसकर्मी (फ़ाइल फ़ोटो)
Image caption वीआईपी सुरक्षा के कारण जनता को हुई परेशाने के आरोप पहले भी लगे हैं

भारत में जब मंत्री और अन्य वीआईपी सड़कों पर उतरते हैं तो उनके सुरक्षा के इंतज़ाम के कारण आम आदमी को परेशानी झेलनी पड़ती है. कानपुर में एक बच्चे की मृत्यु के बाद ये मुद्दा दोबारा उठा है.

कानपुर में एक दंपत्ति ने आरोप लगाया है कि हाल में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की यात्रा के दौरान पुलिस ने उन्हें अपने घायल बेटे को सीधे रास्ते से अस्पताल नहीं ले जाने दिया और देर होने के कारण उनके बेटे की मृत्यु हो गई.

मामले की स्वतंत्र समीक्षा के अभाव में फ़िलहाल यह कह पाना मुश्किल है कि बच्चे की मौत की वजह उसे अस्पताल में पहुँचाने में हुई देरी ही थी या कोई और वजह थी.

बच्चे के माँ-बाप ने व्यवस्था में बदलाव की गुहार लगाई है 'ताकि भविष्य में कोई इस तरह बेमौत न मारा जाए.'

लोहे का गेट गिरने से घायल हुआ

कानपुर के श्यामनगर में सात साल का बालक अमन ख़ान तीन जुलाई को अपने ही घर में लोहे का गेट गिरने से गंभीर रूप से घायल हो गया. पिता तहद्दुद हुसैन ख़ान ख़ून से लथपथ बेटे को कार से सर्वोदयनगर स्थित एक अस्पताल ले जा रहे थे.

उनका कहना है, "....लेकिन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सुरक्षा के कारण पुलिस ने अस्पताल से एक किलोमीटर पहले जीटी रोड पर नाका लगाकर रास्ता रोक रखा था. गुज़ारिशों के बावजूद पुलिस ने उन्हें रास्ते पर जाने नहीं दिया और अस्पताल पहुँचने में एक घंटा लग गया."

तहद्दुद ख़ान का कहना है कि मजबूरी में वह इधर-उधर से घूमते हुए दूरदराज़ के रास्ते से अस्पताल पहुंचे. इस बीच उनके बेटे अमन ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया.

अमन की माँ उषा शर्मा का कहना है कि उन्हें ज़िंदगी भर इस बात का दर्द रहेगा कि अस्पताल पहुँचाने में पांच मिनट की देर के कारण उनके बेटे की जान चली गई.

थोड़ी देर के लिए ट्रैफ़िक रोका

अफसरों का कहना है कि जीटी रोड बहुत थोड़ी देर के लिए रोकी गई थी और दूसरे वैकल्पिक रास्ते खुले थे.

प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिए ज़िम्मेदार एसपीजी के अफसरों ने अमन की मौत पर शोक प्रकट करने के साथ ही सफ़ाई दी है बच्चे की मौत पहले ही रास्ते में हो गई थी.

उधर पुलिस प्रशासन के अफ़सरों ने सफ़ाई दी है कि माँ-बाप ने उनसे इस तरह की कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई है और शिकायत आने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

लेकिन पीड़ित परिवार का कहना है कि न तो वह किसी के खिलाफ़ शिकायत करना चाहते हैं, न बेटे की मौत के बदले कोई मुआवज़ा या आर्थिक सहायता चाहते हैं, क्योंकि इससे उनका बेटा तो वापस नहीं आएगा.

पिता हुसैन ख़ान और माँ उषा शर्मा ने लखनऊ में पत्रकारों के सामने रो-रोकर व्यवस्था से गुहार लगाई कि भविष्य में इस तरह किसी घायल या बीमार का रास्ता न रोका जाए.

माँ उषा शर्मा ने कहा, "मैं तो कहूँगी कि दुनिया में कहीं भी कितना भी बड़ा अधिकारी, प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति आ-जा रहा हो, घायलों और बीमार लोगों का रास्ता न रोका जाए क्योंकि अपने परिवार के लिए हर व्यक्ति क़ीमती है."

दिल्ली में कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता मनीष तिवारी ने इस घटना के लिए खेद प्रकट किया है. भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता रवि शंकर प्रसाद ने प्रधानमंत्री की सुरक्षा बंदोबस्त में मानवीय दृष्टिकोण अपनाने कि अपील की है.

इससे पहले पिछले साल प्रधानमंत्री की चंडीगढ़ यात्रा के दौरान भी इलाज के अभाव में एक मरीज़ के दम तोडने कि खबर आई थी.

लेकिन यह बात केवल प्रधानमंत्री की यात्रा तक सीमित नहीं है. राष्ट्रपति और दूसरे वीआईपी के दौरों में भी लोगों को इस तरह की परेशानी झेलनी पडती है. सरकार चाहे जिस भी पार्टी की हो पुलिस का रवैया वही रहता है.

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