सत्यम ने कर्ज़ कम दिखाया: सीबीआई

सत्यम
Image caption सत्यम घोटाला देश के सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में एक माना जाता है

भारत की जाँच एजेंसी केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) ने देश के बड़े वित्तीय घोटालों में से एक सत्यम मामले में नई जानकारी दी है.

सीबीआई के मुताबिक सत्यम मामले से कंपनी के प्रोमोटर और उनके परिवार को गलत तरीके से 2743 करोड़ रुपए तक का फ़ायदा हुआ. जबकि निवेशकों और विभिन्न संस्थानों को 14162.25 करोड़ का नुक़सान हुआ.

साल 2008 के अंत में कंपनी के शेयर के दाम जहाँ 227 के आस-पास थे, सितंबर 2009 में शेयर के दाम 20 रुपए तक पहुँच गए.

सीबीआई का कहना है कि उसने सत्यम घोटाले को सामने लाने के लिए जानकारों से मदद ली.

सीबीआई के मुताबिक कंपनी ने कहा कि उसके पास 5040 करोड़ की नकदी है, जो कि झूठ था. कंपनी के ऊपर कर्ज़ का बोझ 1230 करोड़ रुपए कम करके दिखाया गया. कंपनी ने 490 करोड़ रुपए की देनदारी दिखाई, जो गलत था.

पिछले साल जनवरी में सत्यम प्रमुख बी रामलिंग राजू ने मुंबई स्टॉक एक्सचेंज, सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ़ इंडिया (सेबी) और कंपनी के बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स को लिखी एक चिट्ठी में कंपनी घोटाले की बात स्वीकारी थी.

घोटाला

सीबीआई के मुताबिक कंपनी में पहली बार घोटाले की बात तब सामने आई जब किसी व्यक्ति ने कंपनी के एक प्रमुख अधिकारी अब्राहम के ईमेल अकाउंट से कंपनी के डॉयरेक्टर कृष्णा जी पालेपु को कंपनी बैलेंसशीट में घोटाले और चेयरमैन की भूमिका की बात ईमेल पर भेजी. इस सूचना को फिर बाकी के बोर्ड डॉयरेक्टर्स के साथ बांटा गया.

सीबीआई के मुताबिक डीएसपी मेरिल लिंच के नॉन एक्जेक्युटिव डॉयरेक्टर हेमंत कोठारी बार-बार राजू से बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स की संख्या बढ़ाने पर ज़ोर दे रहे थे, लेकिन उनकी बात नहीं मानी गई.

बैलेंस शीट में गड़बड़ी की बात सामने आने के बाद हेमंत कोठारी और राजू के बीच गहन बातचीत हुई जिसमें ये सामने आया कि गड़बड़ी की रकम बहुत ज़्यादा है. कोठारी के ज़ोर देने की बाद ही राजू ने गड़बड़ी की बात कबूली.

सीबीआई के मुताबिक सत्यम ने झूठे खरीदार बनाए, उनके नाम पर झूठे बिल और ईमेल आईडी बनाई, कंपनी ने बैंक से कर्ज़ लिया. इन सबका ज़िक्र बैलेंस शीट में नहीं था.

पारदर्शिता नहीं

एजेंसी ने कहा कि कंपनी डायरेक्टर्स अपनी ज़िम्मेदारी निभाने में विफल रहे. उन्हें अच्छे-खासे पैसे के साथ स्टॉक ऑप्शन भी मिलते थे.

कंपनी बैठकें तो सिर्फ़ नाम के लिए होती थीं और कोई खुली बातचीत नहीं होती थी. इसके अलावा सत्यम ने करीब 6000 एकड़ ज़मीन की खरीदारी के लिए 327 फ़्रंट कंपनियाँ बनाई जिनके 12 पते थे.

इसके अलावा सीबीआई ने कहा कि कंपनी ऑडिटर्स ने अपना काम नहीं किया, उन्होंने झूठे इनवायसों पर ध्यान नहीं दिया. नकद और बैंक में जमा पैसे की जाँच नहीं की. और अगर कोई बात सामने आई भी तो ऑडिट टीम लीडर ने उस पर ध्यान नहीं दिया.

एक टिप्पणी में सीबीआई का कहना था कि ऑडिटर्स कंपनी से ज़्यादा प्रोमोटर्स के ज़्यादा वफ़ादार थे.

जाँच में इनसाइडर ट्रेडिंग, बेनामी कारोबार की बात भी सामने आई है. इस मामले में जितनी भी चार्जशीट फ़ाइल की गईं थीं, उन्हें मिला दिया गया था ताकि मामले की जाँच तेज़ी से हो सके.

मामला अभी आंध्र प्रदेश की विशेष मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत में चल रहा है.

संबंधित समाचार