मंत्री पर हमले का कोई सुराग नहीं

घटनास्थल
Image caption विस्फोट ने राज्य में राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है

कैबिनेट मंत्री नन्दलाल गुप्ता नंदी पर सोमवार को इलाहाबाद में हुए प्राणघातक हमले में पुलिस अभी तक अँधेरे में है.

हमलावरों के बारे में जानकारी तो दूर की बात है पुलिस अभी तक यह भी तय नहीं कर पाई है कि पुलिस सुरक्षा में चल रहे मंत्री पर हमले में कौन सा विस्फोटक इस्तेमाल हुआ और वह विस्फोटक कहाँ रखा था या फिर यह कि हमला व्यावसायिक प्रतिद्वंद्विता का नतीजा है अथवा राजनीतिक दुश्मनी का.

इस हमले में एक व्यक्ति की जान जा चुकी है जबकि मंत्री, एक पत्रकार, एक पुलिस गनर , एक सफ़ाई कर्मचारी और मंत्री के जनसंपर्क अधिकारी गंभीर रूप से घायल हैं.

उत्तर प्रदेश में किसी कैबिनेट मंत्री पर हमले का यह पहला मामला है. इसी तरह रिमोट से बम विस्फोट करके हमले का भी उत्तर प्रदेश का यह पहला मामला है , जिसने न केवल पुलिस प्रशासन बल्कि राजनीतिक लोगों को भी दहला दिया है.

अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ब्रजलाल ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस में बताया कि विस्फोट में अमोनियम नाइट्रेट का इस्तेमाल नहीं हुआ, लेकिन किस विस्फोटक का इस्तेमाल हुआ यह पता लगाना बाकी है.

उन्होंने बताया कि इसके लिए घटनास्थल से नमूने और विस्फोट में उड़ी स्कूटी के अवशेष आगरा की प्रयोगशाला में जांच के लिए ले जाए गए हैं.

पुलिस का कहना है कि स्कूटी के मालिक का अभी तक पता नहीं चला है क्योंकि उसका चेसिस नंबर मिटा दिया गया है.

पुलिस महानिदेशक का कहना है कि मौके से कोई घड़ी नहीं मिली है इससे लगता है कि यह टाइम बम नहीं था. लेकिन उनका कहना है कि संभावना है कि विस्फोट के लिए रिमोट का इस्तेमाल हुआ हो.

सवालों के जवाब में उन्होंने बताया कि अभी तक किसी को हिरासत में नहीं लिया गया है.

मक़सद पर भी सवाल

Image caption विस्फोट में घायल नंद गोपाल गुप्ता मायावती सरकार में कर एवं निबंधन मंत्री हैं

पुलिस अभी यह कहने कि स्थिति में भी नहीं है कि हमले का मक़सद क्या था.

हालांकि स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि यह व्यावसायिक प्रतिद्वंद्विता, ज़मीन जायदाद पर कब्ज़े अथवा लेन-देन के झगड़े का मामला हो सकता है.

स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि नंदी पहली बार ही विधायक बने और फिर कैबिनेट मंत्री का पद हासिल कर लिया.

उनका कहना है कि इसके बाद उन्होंने बहुत थोड़े समय में ही कई तरह के व्यवसाय खड़े कर लिए थे और इलाहाबाद में कई ज़मीनें खरीदीं.

जहाँ उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच राज्य पुलिस को सौंपी है वहीं विपक्षी दल मामले की सीबीआई जाँच की मांग कर रहे हैं.

विपक्षी दल इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री पर क़ानून व्यवस्था संभालने में सरकार की असफलता बताते हुए उनका त्यागपत्र मांग रहे हैं, जबकि सरकार के वरिष्ठ मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्या इसे सरकार पर हमला बताते हुए दोषियों को कड़ी सजा दिलाने की बात कह रहे हैं.

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