आंध्र में किसानों की जीत

आंध्र प्रदेश में धान की रोपाई
Image caption स्थानीय किसानों के अनुसार परियोजना से उपजाऊ भूमि प्रदूषित होगी

आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम ज़िले की आम जनता ने कोयले से बिजली बनाने की प्रस्तावित परियोजना के विरुद्ध अपनी लड़ाई में पहली सफलता प्राप्त की है.

एक पर्यावरण अपीलीय न्यायाधिकरण ने इस परियोजना के विरोध में दाखिल की गयी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए इस प्लांट को सरकार की ओर से दी गयी मंज़ूरी को रद्द कर दिया है.

कुछ पर्यावरण और ग़ैर सरकारी संगठनों ने सोम्पेट के लोगों की तरफ़ से याचिका दाखिल की थी जिसमें कहा गया था कि इस बिजली घर से उस इलाके में कृषि भूमि, पक्षियों और पर्यावरण पर असर पड़ेगा.

दिल्ली स्थित न्यायाधिकरण ने ये फ़ैसला सोम्पेट में हिंसा और पुलिस कार्रवाई में चार किसानों के मारे जाने के एक दिन बाद सुनाया है.

उसने कहा है कि इस परियोजना के पर्यावरण और उपजाऊ भूमि पर पड़नेवाले प्रभाव के मूल्यांकन की आवश्यकता है.

श्रीकाकुलम ज़िले में 1800 एकड़ भूमि पर प्रस्तावित इस परियोजना में 2640 मेगावाट बिजली के उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है.

नागार्जुना नाम की एक निजी कंपनी 12000 करोड़ रूपए के पूँजी निवेश से ये बिजलीघर बनानेवाली थी.

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री के रोसैया ने कहा है कि राज्य सरकार न्यायाधिकरण के आदेश को मानते हुए परियोजना के काम को रोक देगी.

इस परियोजना के विरुद्ध सोम्पेट की जनता की जीत की तुलना पश्चिम बंगाल में सिंगुर में प्रस्तावित टाटा के नैनो कारखाने का विरोध करनेवाली जनता की जीत से की जा रही है.

हंगामा

न्यायाधिकरण का फ़ैसला ऐसे समय आया है जब राज्य में बुधवार की व्यापक हिंसा और पुलिस फायरिंग को लेकर बवाल उठ खड़ा हुआ है.

राज्य के गृह मंत्री साबित इन्द्र रेड्डी ने विधान सभा में कहा कि पुलिस ने अपने बचाव में फ़ायरिंग की क्योंकि उस पर पत्थर और लाठियों से हमला किया गया.

उन्होंने कहा कि कुल मिलकर 145 लोग घायल हुए जिनमें 37 पुलिसकर्मी भी थे.

राज्य सरकार ने हर मृतक के परिवार को पाँच लाख रुपए और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की है.

मगर इस मामले पर हैदराबाद में विधानसभा में भारी हंगामा हुआ.

विपक्ष ने श्रीकाकुलम जिले से संबंध रखनेवाले राजस्व मंत्री धर्मना प्रसाद राव के त्याग पत्र की माँग की और कहा कि इस हिंसा के लिए वही ज़िम्मेदार हैं क्योंकि उन्होंने बिजली परियोजना के पक्ष में भड़काउ बयान देकर लोगों को और उत्तेजित कर दिया.

हंगामे के बाद सदन के अध्यक्ष ने तेलुगू देसम के 57 सदस्यों को निलंबित कर दिया.

मंत्री धर्मना प्रसाद ने कहा कि कोयले से बिजली बनाने की परियोजना का उद्देश्य श्रीकाकुलम जैसे पिछड़े जिले में औद्योगिक विकास लाना और हजारों लोगों को रोज़गार उपलब्ध करवाना था.

लेकिन विपक्ष के नेता ने कहा कि केवल एक ही ज़िले में कोयले से बिजली बनाने के कई प्लांट बनाना और उससे 10 हज़ार मेगावाट बिजली का उत्पादन आश्चर्यजनक है क्योंकि इससे कृषि क्षेत्र बर्बाद हो जायएगा और प्रदूषण से मछुआरे भी रोज़गार से वंचित हो जाएँगे.

कुल मिलाकर इस ज़िले में चार बड़े बिजली घरों की योजना को मंज़ूरी दी गई थी जिसमें 85 हज़ार करोड़ का पूंजी निवेश होने वाला था.

लेकिन अब नागार्जुन कंपनी की परियोजना के इस सख्त विरोध के बाद दूसरी परियोजनाओं पर भी एक प्रश्न चिन्ह लग गया है.

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