कल्याण से दोस्ती का मुलायम को है मलाल

मुल्याम और कल्याण
Image caption मुलयाम सिंह के इस बयान को विपक्ष ने अवसरवादिता बताया है.

समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने गुरुवार को पिछले लोक सभा चुनाव में कल्याण सिंह का साथ लेने के लिए मुसलमानों से माफ़ी मांगी है.

सपा से निष्कासित नेता आजम खान ने मुलायम की इस माफ़ी पर मुसलमानों से इत्मीनान से विचार करने की अपील की तो विपक्ष ने इस बयान को हास्यास्पद और अवसरवादी बताया.

नेता जी का आश्वासन

यादव ने अपने बयान में कहा, ''पिछले लोकसभा चुनाव सांप्रदायिक शक्तियों की सरकार को केंद्र में सत्तारूढ़ होने से रोकने में कुछ ग़लत तत्वों का साथ लेना पड़ा, जिससे भ्रमित होकर सभी धर्मनिरपेक्ष, विशेषकर मुसलमान भाइयों को कष्ट हुआ और और उनकी भावनाओं को ठेस पहुँची.''

इसे अपनी ग़लती बताते हुए यादव ने कहा,''वे भविष्य में फिर कभी मस्जिद गिराने वाले लोगों का साथ नहीं लेंगे.''

मुसलमानों से बिना शर्त माफ़ी माँगते हुए यादव ने कहा, ''मै इस घटना के लिए देश के सभी विशेषकर अपने मुसलमान भाइयों से माफ़ी माँगता हूँ. उन्हें आश्वस्त करना चाहता हूँ कि भविष्य में उनके हितों को सर्वोपरि मानते हुए उनके सम्मान की रक्षा के लिए पूरी निष्ठा से काम करता रहूँगा.''

उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 1990 में मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने बाबरी मस्जिद को गिराने से रोका था.

सपा के एक मजबूत मुस्लिम नेता मोहम्मद आज़म खान ने कल्याण सिंह के साथ को मुद्दा बनाकर लोकसभा चुनाव में मुलायम सिंह को आड़े हाथों लिया था.

इस विरोध के कारण उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था.

राजनीतिक टीकाकारों का मानना है कि पिछले लोकसभा चुनाव में मुस्लिम समुदाय मुलायम से नारज़ होकर कांग्रेस के साथ चला गया था.

विपक्ष का आरोप

इसे महसूस करते हुए मुलायम सिंह यादव ने चुनाव के बाद कल्याण सिंह का साथ छोड़ दिया था. लेकिन मुस्लिम समुदाय इससे भी संतुष्ट नहीं था.

अब अगले विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए मुलायम फिर से मुस्लिम समुदाय को रिझाने में लगे हुए हैं.

समझा जाता है कि आज़म खान को वापस लाने कि भी कोशिश हो रही हैं और इसी की तैयारी में यह बयान दिया गया लगता है.

मुलायम सिंह की माफ़ी के बाद आजम खान ने मुसलमानों से फूंक-फूंक कर क़दम रखने की अपील की है.

रामपुर में पत्रकारों से खान ने कहा,''इस मामले में जल्दीबाजी नहीं करनी चाहिए. मुलयाम ने जो माफी माँगी है इस पर विचार करेंगे. अभी पार्टी में वापस जाने का कोई विचार नहीं है और न ही कोई प्रस्ताव मिला है.''

जानकारों का कहना है कि आज़म ख़ान का झगड़ा मुख्य रूप से अमर सिंह और जयाप्रदा से था और वे दोनों पार्टी से बाहर हो गए हैं.

इसके अलावा मुलायम ने मुसलमानों से माफ़ी माँगने का बयान जारी कर उनकी शर्त भी पूरी कर दी है.

कल्याण की उम्मीद

उधर, कल्याण सिंह ने कहा है कि मुलायम चाहे जो कर लें अब दुबारा सत्ता में नही आएँगे.

भाजपा की उत्तर प्रदेश ईकाई के अध्यक्ष सूर्य प्रताप शाही ने मुलायम के इस बयान को अवसरवादी बताया है.

भाजपा नेता ने कहा, ''कांग्रेस, सपा और बसपा के बीच मुस्लिम वोट बैंक हासिल करने की गलाकाट प्रतिस्पर्धा है. तीनों दल मुस्लिम वोट बैंक हासिल करने के लिए ही तरह-तरह के जुगाड़ कर रहे हैं. सपा प्रमुख की ताजा माफ़ी भी इसी कसरत का नतीजा है.यह अवसरवाद की पराकाष्ठा है.''

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष और राज्य की मुख्यमंत्री मायावती ने यादव के इस बयान को हास्यास्पद और राजनीतिक शोशेबाजी बताया है.

मायावती ने कहा,''ऐसे नेता जिनके दिल में कुछ और जुबान पर कुछ और होता है उन पर किसी को कभी विश्वास नहीं करना चाहिए.''

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