लौकी का 'ज़हरीला' जूस और नुक्कड़ नाटक

नुक्कड़ नाटक
Image caption भोपाल में लौकी के बारे में डर हटाने के लिए अब नुक्कड़ नाटकों का सहारा

दिल्ली में लौकी का ज़हरीला जूस पीने से एक वैज्ञानिक की मौत की ख़बर का शायद सबसे ज़्यादा असर भोपाल में हुआ है. वहाँ लौकी के कद्रदानों की ख़ासी कमी हो गई है.

भोपाल में न केवल लौकी की बिक्री ख़ासी घट गई है बल्कि अब शहर के परेशान व्यापारी नुक्कड़ नाटकों के ज़रिए लोगों में जागरुकता लाने में जुट गए हैं....मक़सद यह कि लोग फिर से लौकी खाने लगें.

भोपाल के हाट में चल रहे इन नुक्कड़ नाटकों के ज़रिए लोगों को लौकी के फ़ायदे बताए जा रहे हैं. वहीं ये भी संदेश दिया जा रहा है कि 'राजनीति किसी भी मुद्दे पर हो मगर कम से कम फल-सब्ज़ियों के नाम पर न हो.'

भोपाल में लौकी के ख़रीददार एकदम कम हो गए हैं. जहां पहले दस टन लौकी रोज़ उठती थी अब वो चार टन रह गई है. हमारे पास लोगों को जागरुक करने के अलावा कोई चारा नहीं रह गया है. हम जागरुकता अभियान नुक्कड़ नाटक के ज़रिए चला रहे हैं मुजाहिद सिद्दीकी, व्यापारी संघ के प्रवक्ता

भोपाल के बिठ्ठन मार्केट-भदभदा सब्ज़ी मंडी व्यापारी संघ के प्रवक्ता मुजाहिद सिद्दीकी कहते हैं, "भोपाल में लौकी के ख़रीददार एकदम कम हो गए हैं. जहां पहले दस टन लौकी रोज़ उठती थी अब वो चार टन रह गई है. हमारे पास लोगों को जागरुक करने के अलावा कोई चारा नहीं रह गया है. हम जागरुकता अभियान नुक्कड़ नाटक के ज़रिए चला रहे हैं."

गिनाए जा रहे हैं फ़ायदे

जो नुक्कड़ नाटक हो रहे हैं उनमें शारदा लोक कला संस्था के कलाकार बता रहे हैं कि 'लौकी के नाम पर राजनीति हो रही है.' इस नाटक में पति, पत्नी और किशन भैया नामक किरदार ये बताने की कोशिश कर रहे हैं कि लौकी के फ़ायदे अनेक हैं.

नाटक में पत्नी का किरदार निभा रही शारदा राव कहती हैं, "इस नाटक में बताया गया है कि लौकी कभी भी नुक़सानदायक नहीं हो सकती है. मेरा भी मानना है कि किसी भी मामले की तह तक जाना चाहिए. उसी के बाद फैसला करना चाहिए. इस नाटक के ज़रिए हम एक तरह से शाकाहार को भी बढ़ावा दे रहे हैं."

भोपाल में पहले लौकी जहां 20 से 30 रुपए किलो बिक रही थी वो अब पांच से छह रुपए प्रति किलो में बिक रही है. थोक बिक्री में इसकी कीमत एक से दो रुपए रह गई है.

सब्ज़ी व्यापारी गोविंद सोनाने की इस मामले पर अलग ही राय है. वे कहते हैं, "लौकी के बहुत से फा़यदे हैं. डॉक्टरों ने भी इसे फ़ायदेमंद बताया है. ये सब बाबा रामदेव की छवि धूमिल करने के लिए किया जा रहा है."

लोगों में डर

शहर में लोगों से बात करें तो नज़र आता है कि बड़ी संख्या में लोगों ने लौकी के सेवन से मुंह फेर लिया है लेकिन कई लोगों को इस घटना ने ख़ास प्रभावित नहीं किया है.

काफ़ी सालों से लौकी का सेवन करने वाले सुनील गायकवाड़ कहते हैं, "मैं तो हमेशा लौकी का जूस पीता रहा हूं. मगर अब ख़बर देखकर मैंने भी पीना बंद कर दिया है. जिस तरह से कीटनाशकों का इस्तेमाल हो रहा है, उससे वाकई जान जा सकती है."

मंडी से हमेशा सब्ज़ी ख़रीदने वाली प्रीति शर्मा कहती हैं, "जान जाने से तो सभी डरते हैं. लौकी के फ़ायदे भले ही हों लेकिन ये भी सच है कि उससे जान चली गई. मैं फिलहाल कुछ महीनों तक तो लौकी नहीं लूंगी."

मगर कुछ ऐसे भी हैं जिन्हें इन ख़बरों से कोई फ़र्क नहीं पड़ता. गायत्री त्रिपाठी कहती हैं, "लाखों में एक दो मामले हो सकते हैं. ये कहना कि हर लौकी से कुछ हो जाएगा ग़लत है. मैंने तो लौकी खाना न छोड़ा है और न ही छोड़ने का इरादा है."

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