भोपाल ट्रस्ट: अहमदी का इस्तीफ़ा मंज़ूर

गैस पीड़ित
Image caption भोपाल त्रासदी में 15 हज़ार लोग मारे गए

सुप्रीम कोर्ट ने भोपाल गैस कांड के पीड़ितों के लिए बनाई गई भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल ट्रस्ट के चेयरमैन के पद से पूर्व मुख्य न्यायधीश एएम अहमदी का इस्तीफ़ा स्वीकार कर लिया है.

उन्होंने एक महीने पहले इस्तीफ़ा देने की पेशकश की थी.

भोपाल में 31 जून 1984 को यूनियन कारबाईड के कारखाने से मिथाइल आईसोसाइनेट गैस के लीक होने के कारण, सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक 15 हज़ार लोग मारे गए हैं और पाँच लाख लोग विभिन्न बीमारियों से ग्रस्त हैं.

ग़ौरतलब है कि हाल में जून में भोपाल गैस कांड के 25 साल पूरे होने पर अनेक ख़बरे आई थीं जिनमें जस्टिस अहमदी की पीठ के वर्ष 1996 के फ़ैसले की आलोचना हुई थी.

उस न्यायिक आदेश में यूनियन कारबाईड के ख़िलाफ़ आपराधिक मामले की धाराओं में बदलाव किया गया था.

भारत सरकार ने पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट से भोपाल ट्रस्ट का कामकाम अपने हाथ में लेने की इजाज़त माँगी थी और सरकार को इसके लिए इजाज़त मिल गई है.

सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के बाद यूनियन कारबाईड ने वर्ष 1992 लंदन में ये ट्रस्ट बनाई गई थी. वर्ष 1998 में जस्टिस अहमदी इसके चेयरमैन बने थे.

सोमवार को मुख्य न्यायाधीश एसएच कपाडिया, न्यायाधीश केएस राधाकृष्णन और स्वतंत्र कुमार की पीठ ने केंद्र सरकार को इजाज़त दी कि वह ट्रस्ट को बंद कर इससे जुड़े अस्पतालों का कामकाज देखे.

ट्रस्ट छह अस्पताल और 32 स्वास्थ्य केंद्र चलाती है.

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