नायडू रिहा होकर हैदराबाद पहुंचे

चंद्रबाबू नायडू
Image caption चंद्रबाबू नायडू ने इस मुद्दे पर काफ़ी कड़ा रुख अपनाया है.

महाराष्ट्र सरकार ने तेलुगु देशम पार्टी के अध्यक्ष चंद्रबाबू नायडू और उनके साथ गिरफ़्तार किए अन्य विधायकों को मंगलवार को रिहा कर दिया.

नायडू और उनके सहयोगियों को महाराष्ट्र के औरंगबाद हवाई अड्डे पर रिहा किया गया जहां से उन्हें विशेष विमान से हैदराबाद भेज दिया गया.

नायडू को शुक्रवार को महाराष्ट्र में गिरफ़्तार किया गया था लेकिन उन्होंने ज़मानत लेने से ये कहकर इंकार किया था कि उन्होंने कोई ग़लती नहीं की जिसके लिए उन्हें गिरफ़्तार किया जाए.

हैदराबाद पहुंचकर उन्हें और उनके सरहयोगियों को अस्पताल ले जाया गया है.

गिरफ़्तारी

नायडू की गिरफ़्तारी और अन्य विधायकों के साथ मार पीट की रिपोर्टें आने के बाद राज्य में हिंसक प्रदर्शन भी हुए.

नायडू और 74 अन्य देशम नेताओं को गत शुक्रवार धर्माबाद में हिरासत में लिया गया था.

नायडू महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश की सीमा पर स्थित भाबली डैम पर जाना चाह रहे थे जब उन्हें गिरफ़्तार किया गया.

इनमें से एक विधायक डी नरेन्द्र ने फ़ोन पर बताया कि महराष्ट्र के अधिकारी चंद्रबाबू नायडू को दोस्तों से अलग करना चाहते थे. जब सब ने उसका विरोध किया तो पुलिस ने लाठियों से उन पर हमला कर दिया जिसमें नायडू और दूसरे विधायकों को चोटें आई.

उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की पुलिस ने आंध्र के विधायकों के सुरक्षाकर्मियों और उनकी गाड़ियों को भी वापस भिजवा दिया.

विवाद

विवाद इस बात को लेकर और बढ़ गया था कि अधिकारियों ने तेलुगु देशम नेताओं को यह बताने से इंकार कर दिया की उन्हें किस जगह भेजा जा रहा है.

धर्माबाद आईटीआई में जहाँ नायडू और दूसरों को रखा गया था, सोमवार रात से ही तनाव बढ़ गया जब पुलिस ने उन्हें एक बहुत ही खस्ताहाल बस में ले जाने की कोशिश की.

गाड़ी की ख़राब हालत देख कर नायडू को गुस्सा आ गया और वो नीचे उतरते हुए गिर पड़े जिसके बाद उन के साथी अँधेरे में वहीं पर धरना देकर बैठ गए.

मंगलवार सुबह जगह जगह तेलुगु देशम कार्यकर्ता सड़कों पर निकल आए. महाराष्ट्र की सीमा पर स्थित सालुर चेकपोस्ट पर कार्यकर्ताओं ने हमला कर के वहां का फर्नीचर ध्वस्त कर दिया.

कई जगहों पर महाराष्ट्र के वाहनों और ट्रकों पर हमले किए गए और तोड़ फोड़ की गई.

वारंगल में कांग्रेस के राज्य सभा सदस्य वी हनुमंता राव की कार पर पथराव किया गया.

विशाखापटनम में सरकारी बसों पर हमले किए गए और उन के शीशे तोड़ दिए गए.

करीमनगर में भी कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री अशोक चव्हान के पुतले जलाए गए. कागजनगर में ट्रेन रोकी गई. नेल्लोर, अनंतपुर और एलुरु में राष्ट्रीय राजमार्गों पर वाहनों को रोका गया.

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