मनमोहन के मंत्रियों पर सवाल

ममता बैनर्जी
Image caption ममता बैनर्जी के कार्यकाल में एक के बाद एक कई रेल दुर्घटनाएँ हो चुकी हैं

पिछले 51 दिनों में दो बड़े रेल हादसे हो जाने के बाद ममता बैनर्जी को विपक्ष ने आड़े हाथों लिया है और यूपीए सरकार के मंत्रिमंडल चयन पर एक बार फिर सवाल उठाए जा रहे हैं.

लेकिन ममता बैनर्जी अकेली मंत्री नहीं हैं जिन्हें कटघरे में खड़ा किया जा रहा है.

यूपीए सरकार के एक के बाद एक मंत्री विपक्षी आलोचना का पात्र बनते जा रहे हैं.

पिछले दिनों खाद्य मंत्री शरद पवार पर अपने मंत्रालय से ज़्यादा क्रिकेट मैनेजमेंट में रूचि लेने के आरोप लगे थे और रसायन एवं उर्वरक मंत्री अलागिरी को उनकी कैबिनेट में कम उपस्थिति होने के कारण निंदा झेलनी पड़ी थी.

ऐसी स्थिति यूपीए सरकार के लिए दोहरी मार साबित हो रही है क्योंकि पिछले कुछ महीनों में सरकार को अपने

कैबिनेट के मंत्रियों को लेकर विपक्ष का ही नहीं बल्कि आम जनता का भी सामना करना पड़ा है.

कई मंत्रियों पर आरोप

'प्रतिदिन' अखबार से जुड़े गौतम लहिरी कहते हैं, "रेल मंत्री ममता बैनर्जी के बारे में एक धारणा बन गई है कि वे ज़्यादातर समय दिल्ली में नहीं बल्कि कोलकाता में बिताती हैं. बंगाल के चुनाव क़रीब आ रहे हैं जिसकी

वजह से रेलमंत्री अपना ध्यान रेलवे मंत्रालय को नहीं दे रही हैं. उन्होने तो खुद ही कहा है कि उनका घर दिल्ली में नहीं बल्कि कोलकाता में है."

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद यानी आईसीसी के अध्यक्ष का कार्यभार संभालने के बाद शरद पवार को भी आलोचना का सामना करना पड़ा है.

उन्होंने पिछले दिनों प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिलकर अपना कार्यभार कम करने को कहा था.

इस पर विपक्ष ने उन्हें ये कहकर आड़े हाथों लिया कि वे आम जनता से ज़्यादा क्रिकेट को लेकर चिंतित हैं.

बिज़नेस भास्कर के राजनीतिक संपादक उर्मिलेश मानते हैं कि केंद्रीय मंत्री अपने मंत्रालयों से बाहर के विषयों में ज़्यादा दिलचस्पी लेते हैं.

उन्होंने बीबीसी से कहा, "मुझे ऐसा लगता है कि पिछले कुछ वर्षों में मंत्रालय में मंत्री का जो दायित्व है, जो स्वायत्तता है, उसमें लगातार कटौती हो रही है."

यही नहीं, यूपीए कैबिनेट के रसायन एवं उर्वरक मंत्री एमके अलागिरी पर बैठकों से ज़्यादातर ग़ायब रहने के आरोप लगते रहें हैं जिसकी वजह से विपक्ष ने उन्हें ‘गैरहाज़िर मंत्री’ क़रार दिया है.

आरोप हैं कि उनकी दिलचस्पी भी दिल्ली की बजाय तमिलनाडु की राजनीति में अधिक है.

यूपीए-2 के कार्यकाल में हुई कैबिनेट बैठकों में अलागिरी और रेल मंत्री ममता बनर्जी गैरहाज़िरी की सूची में शीर्ष पर थे.

इन सब मंत्रियों को ले कर यूपीए सरकार को एक अटपटी स्थिति का सामना करना पड़ रहा है.

ममता बैनर्जी को लेकर उठे ताज़ा विवाद के बाद अब कैबिनेट मंत्रियों के चयन को लेकर सफ़ाई देने का भार प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर आ गया है.

पत्रकार उर्मिलेश का कहना है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को इस मसले पर गंभीर रूप से विचार करना चाहिए.

उन्होंने कहा "लोकतांत्रिक प्रणाली में कैबिनेट मंत्रियों का जो सामूहिक दायित्व होता है, उसको मज़बूत किया जाना चाहिए."

ये विवाद ऐसे समय में हो रहे हैं जब चर्चा भी चल रही है कि मनमोहन सिंह अपने मंत्रिमंडल में फेरबदल कर सकते हैं.

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