दुर्घटना का रहस्य

सैंथिया स्टेशन पर ट्रेन हादसा
Image caption दुर्घटना का रहस्य गहराता जा रहा है.

सोमवार को पश्चिम बंगाल के सैंथिया रेलवे स्टेशन पर हुई दुर्घटना की प्रारंभिक जांच के नतीजे ट्रेन के ड्राइवर की ग़लती की ओर इशारा करते हैं लेकिन ट्रेनों की टक्कर के रहस्य की गुत्थी अभी पूरी तरह नहीं सुलझी है.

दो ट्रेनों की टक्कर में 63 लोगों की मौत हुई है और 140 के क़रीब घायल हुए हैं, जिनमें से कुछ की हालत गंभीर है.

रेलवे अधिकारियों ने बीबीसी को बताया है कि उत्तरबंगा एक्सप्रेस ने सैंथिया स्टेशन पर 90 किलोमीटर प्रतिघंटा की तेज़ गति के साथ प्रवेश किया, हांलाकि ट्रेन को सैंथिया में रुकना था और इसलिए उसकी गति 30 किलोमीटर प्रति घंटा या इससे कम होनी चाहिए थी.

रेलवे बोर्ड की चेयरमैन विवेक सहाय कहते हैं, “लाल बत्ती का उल्लंघन करने के बाद भी ड्राइवर ने ना तो आपातकालीन और ना ही साधारण ब्रेक का प्रयोग किया. साथ ही ड्राइवर ने लगातार दिए जा रहे वायरलेस संदेशो का भी जवाब नहीं दिया.”

उत्तरबंगा एक्सप्रेस के ड्राइवर ने सैंथिया स्टेशन के बाहर तैनात लगातार लाल झंडा लहरा रहे केबिनमैन के संकेत का भी कोई जवाब नहीं दिया.

'कोई प्रतिक्रिया नहीं'

केबिनमैन मातोर लेट ने बीबीसी को बताया, “मैं अपने वायरलेस पर चिल्लाते हुए उत्तरबंगा एक्सप्रेस को रुकने के लिए कह रहा था, जब इसका कोई असर नहीं हुआ तो मैंने तेज़ी से लाल झंडा लहराना शुरु कर दिया लेकिन ट्रेन निकल गई और स्टेशन पर खड़ी वनांचल एक्सप्रेस से टकरा गई.”

दरअसल, सैंथिया के असिसटेंट स्टेशन मास्टर पुलक चक्रवर्ती को दुर्घटना का अंदाज़ा हो गया था और वो माइक हाथ में लेकर लोगों से सुरक्षित स्थान की ओर भागने के लिए कह रहे थे.

वनांचल एक्सप्रेस कई घंटे देरी से चल रही थी लेकिन उत्तरबंगा कुछ ही मिनट की देरी से चल रही थी.

उत्तरबंगा के ड्राइवर एमसी डे का रेलवे में अच्छा रिकॉर्ड था. दरअसल वे भारतीय रेलवे के 20 चोटी के ड्राइवरों में से एक थे. डे पिछले सात साल से अपने हुनर के लिए लगातार ‘ए ग्रेड’ हासिल करते रहे थे.

उनके सह-चालक निर्मल कुमार मंडल का रिकॉर्ड भी अच्छा था.

जांच के बाद सामने आए तथ्यों से पता चलता है कि दुर्घटना के समय दोनों ने शराब नहीं पी थी.

उन्होंने दुर्घटना से पांच मिनट पहले गदाधरपुर हॉल्ट पर सिग्नल मिलने के बाद ही ट्रेन को आगे बढ़ाया था.

रहस्य

पूर्वी रेलवे की सुरक्षा आयुक्त आरती यादव कहती हैं, “ये कैसे हो सकता है कि उन्होंने ट्रेन को गदाधरपुर तक पूरे नियंत्रण में रखा लेकिन पांच मिनट बाद स्टेशन पर खड़ी ट्रेन से टकरा दिया.”

उत्तरबंगा एक्सप्रेस गदाधरपुर हॉल्ट से सुबह एक बजकर छप्पन मिनट पर सिग्नल मिलने के बाद निकली. ये ट्रेन इसके ठीक पांच मिनट बाद सुबह दो बजकर एक मिनट पर सैंथिया स्टेशन पर खड़ी वनांचल एक्सप्रेस से टकरा गई.

दुर्घटना का रहस्य इससे और गहरा जाता है कि उत्तराबंगा एक्सप्रेस के ड्राइवर और उनके सहयोगी को उनकी सीटों पर मृत पाया गया था.

रेलवे अधिकारी हैरान हैं कि गदाधरपुर के हॉल्ट पर सही ढंग से ट्रेन को रोकने और सिग्नल मिलने के बाद आगे बढ़ाने वाले ड्राइवर ठीक पांच मिनट बाद ना तो ब्रेक लगा पाते हैं और ना ही अपनी जान बचाने के लिए ट्रेन से कूद पाते हैं.

अंतिम पांच मिनट

दुर्घटना की जांच कर रहे एक रेलवे अधिकारी कहते हैं, “ये संभव नहीं लगता कि गदाधरपुर हॉल्ट और सैंथिया स्टेशन के बीच पांच मिनटों में दोनों ड्राइवरों ने शराब पी ली हो या उन्हें नींद आ गई हो क्योंकि उन्हें मालूम था कि ट्रेन को सैंथिया स्टेशन पर रुकना है.”

रेलवे अधिकारी ने बताया कि उन्हें अब दोनों ड्राइवरों की पोस्ट मॉर्टम रिपोर्ट का इंतज़ार है.

ये अजीब बात है कि गदाधरपुर हॉल्ट से निकलने के बाद ट्रेन ने 90 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ़्तार पकड़ ली, ख़ासकर तब जबकि उन्हें मालूम था कि सैंथिया स्टेशन पर ट्रेन को रुकना है.

दुर्घटना के बाद विपक्षी दलों के हमले सह रहीं रेल मंत्री ममता बनर्जी ने भी ट्रेनों के टकराने के पीछे किसी संभावित तोड़-फोड़ का अंदेशा जताया है.

फिलहाल इसका कोई सबूत सामने नहीं आया है.

अंतिम पांच मिनटों में ड्राइवरों की रहस्यमयी निष्क्रियता जांचकर्ताओं के लिए एक पहेली बन गई है.

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